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‘भगवंत मान सीएम नहीं बनते तो उनकी दूसरी शादी भी नहीं होती’, कांग्रेस सांसद ने आप नेता पर कसा तंज

पंजाब की राजनीति में AAP के अंदरूनी संकट के बीच नेताओं की निजी जिंदगी पर बयानबाजी तेज हो गई है। सुखजिंदर रंधावा ने भगवंत मान और राघव चड्ढा की शादियों पर टिप्पणी की है।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 28, 2026

Bhagwant Mann With His Wife

Bhagwant Mann With His Wife

AAP: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) इन दिनों दोहरी चुनौती से जूझती दिख रही है। एक तरफ पार्टी के भीतर टूट-फूट और सियासी खींचतान है, तो दूसरी तरफ नेताओं की निजी जिंदगी भी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन गई है। ताजा मामला कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के बयान से जुड़ा है। उन्होंने सीधा निशाना साधते हुए कहा कि अगर भगवंत मान मुख्यमंत्री नहीं बनते, तो उनकी दूसरी शादी शायद नहीं हो पाती। इतना ही नहीं, उन्होंने राघव चड्ढा को लेकर भी टिप्पणी की कि उनकी शादी तो हो ही जाती, चाहे किसी और से क्यों न होती।

कैसे शुरू हुई यह बयानबाजी?


दरअसल, यह पूरा विवाद आप नेता सौरभ भारद्वाज के एक बयान के बाद शुरू हुआ। भारद्वाज ने कहा था कि अगर पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा नहीं भेजा होता, तो उनकी शादी भी शायद नहीं होती। इस बयान के बाद राजनीति में निजी रिश्तों को लेकर तंज और पलटवार का दौर शुरू हो गया। रंधावा ने इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि निजी फैसलों को इस तरह राजनीति से जोड़ना सही नहीं है। लेकिन उन्होंने भी अपनी बात रखते हुए तंज कसने का मौका नहीं छोड़ा।

नेताओं की शादियां क्यों बनी चर्चा का विषय?

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 2022 में दूसरी शादी की थी। उनकी पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर हैं, जो पेशे से डॉक्टर हैं। वहीं, राघव चड्ढा ने 2023 में बॉलीवुड अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा से शादी की थी। यह शादी भी काफी चर्चाओं में रही थी। अब जब पार्टी के अंदर बगावत और मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं, तो इन शादियों को भी सियासी बयानबाजी में घसीटा जा रहा है।

चड्ढा बनाम भारद्वाज, बयान से बढ़ी तल्खी


इसी बीच राघव चड्ढा ने AAP छोड़ने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पार्टी का माहौल खराब हो गया था। उनके मुताबिक, नेताओं को काम करने से रोका जा रहा था और उनकी आवाज दबाई जा रही थी। इस पर सौरभ भारद्वाज ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राजनीति कोई कंपनी नहीं है, जहां मन हुआ तो नौकरी छोड़ दी। उनके अनुसार, राजनीतिक दल विचारधारा पर चलते हैं और उसे इस तरह नहीं छोड़ा जाना चाहिए।