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जब ससुर ने ही खोल दी थी दाऊद की डील की पोल, धरे गए थे भारत के दो बड़े गुटका किंग

ड्रग माफिया सलीम डोला भारतीय जांच एजेंसियों के शिकंजे में आ गया है। माना जाता है कि सलीम मिर्ची के बाद दाऊद के लिए ड्रग्स सप्लाई का काम वही देख रहा था।

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ड्रग माफिया सलीम डोला (बांए) दाऊद के लिए काम करता है।

ड्रग माफिया सलीम डोला भारतीय पुलिस के शिकंजे में आ चुका है। मंगलवार (28 अप्रैल, 2026) की सुबह उसे तुर्की से भारत लाया गया। उसे इस्तांबुल में इतवार को पकड़ा गया था।

सलीम डोला पर एक नहीं, अनेक मुकदमे दर्ज हैं। एक मुकदमा साजिद इलेक्ट्रिकवाला और उसके साथी के अपहरण का भी है। पुलिस के मुताबिक इलेक्ट्रिकवाला को दाऊद इब्राहिम से जुड़े एक गैंग ने 50 लाख रुपये मेफेड्रोन बनाने के लिए दिए थे। इसकी डिलीवरी नहीं करने और पैसे भी रख लेने के कारण उसे 13 जून, 2025 को अगवा कर लिया गया था। पुलिस ने 16 जुलाई, 2025 को उसे उत्तर प्रदेश के बांदा से रिहा करवाया।

सलीम डोला: बेल ली और भाग गया विदेश

डोंगरी के सलीम डोला को 28 जुलाई, 1998 को मुंबई के सहारा एयरपोर्ट पर पकड़ा गया था। वह 40 किलो मैंड्रेक्स टैबलेट की तस्करी कर रहा था। 2017 में उसे फिर पकड़ा गया। तब करीब पांच करोड़ रुपये का गुटका बरामद हुआ था। वह इसे समुद्र के रास्ते गुटखा कुवैत भेजने की तैयारी में था। 2018 में वह जमानत पर था, तभी भाग गया था। तब से वह विदेश से ही ड्रग्स का धंधा चला रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि सलीम मिर्ची के बाद डोला ही दाऊद के लिए ड्रग्स सप्लाई का काम देख रहा है।

सलीम ने बेटे ताहिर और भतीजे मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला समेत कई करीबियों को भी धंधे में हिस्सेदार बना रखा है। ये दोनों पिछले साल इंटरपोल के जरिए यूएई से भारत प्रत्यर्पित किए गए। इनकी गिरफ्तारी से डोला की कमर टूट चुकी थी।

मुनाफा बढ़ाने के लिए नकली गुटका बनाने लगा था दाऊद का सहयोगी अनीस

सलीम डोला कभी गुटके की तस्करी किया करता था। एक समय में गुटके की खूब तस्करी होती थी। पाकिस्तान में इसकी बड़ी मांग थी। 1990 के दशक के मध्य और 2000 के शुरुआती सालों में दुबई से भारी मात्रा में गुटका पाकिस्तान भेजा जाता था। इसकी तस्करी काफी महंगी पड़ती थी। इसे देख कर दाऊद के साथी अनीस ने भारतीय गुटका ब्रांड की नकल खुद बनानी शुरू कर दी और पाकिस्तान में बेचने लगा।

उन दिनों भारत में गुटका के दो बड़े कारोबारी थे। जगदीश जोशी (गोवा नाम से गुटका बनाने वाले) और रसिक मानिकचंद धारीवाल। दोनों में बड़ी अदावत थी और 70 करोड़ रुपये को लेकर विवाद था। जोशी ने विवाद सुलझाने के लिए अनीश की मदद ली।

अनीश के लिए यह मनचाही मुराद पूरी होने जैसी थी। उसने दुबई में धारीवाल से संपर्क साधा और जोशी से विवाद सुलझाने में मध्यस्थता की पेशकश की। धारीवाल ने कहा जो भी बात हो, दाऊद की मौजूदगी में हो।

कुछ ही दिनों बाद जोशी और धारीवाल कराची में दाऊद के हवेली में बातचीत की मेज पर बैठे थे। दाऊद ने फैसला सुनाया। धारीवाल 7 करोड़ रुपये जोशी को देंगे और 4 करोड़ दाऊद को मध्यस्थता कराने के बदले देंगे। दोनों हामी भरने ही वाले थे कि अनीस बीच में कूद पड़ा। उसने भी बहती गंगा में हाथ धोने का फैसला किया और कहा कि इतना पुराना विवाद सुलझ रहा है तो जोशी अनीस को गुटका बनाने के सारे गुर समझाएंगे।

गुटका कारोबारी ने लगवाया अनीस का प्लांट

अनीस लंबे समय से पाकिस्तान में गुटका बनाने का प्लांट लगाना चाहता था। जोशी की मदद से कुछ ही महीने बाद उसका यह प्लान पूरा हो गया।

एस, हुसैन जैदी ने अपनी किताब 'डोंगरी टु दुबई: सिक्स डिकेड्स ऑफ द मर्डर माफिया' में यह ब्योरा देते हुए बताया है कि 2004 में पुलिस दाऊद के लिए काम करने वाले सलीम चिप्लुन और अनीस के बीच एक फोन काल सुनने की कोशिश कर रही थी। इसी कॉल से पुलिस को पता चला कि ये चोर बाजार से गुटका बनाने वाली मशीन के पुर्जे खरीदने की बात कर रहे थे। पुलिस को शक हुआ तो उसने जांच शुरू की। जांच के सिलसिले में पुलिस ने दाऊद के ससुर इब्राहिम कश्मीरी को पूछताछ के लिए बुलाया। इसी पूछताछ में गुटका किंग और अंडरवर्ल्ड की गलबहियों की पोल खुल गई। इसके बाद जोशी और धारीवाल पर पुलिस का शिकंजा कस गया।