
Yes Bank inflation report: देश में खुदरा और थोक महंगाई को लेकर भी भले ही राहत के संकेत मिल रहे हों, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों को लेकर कोई भी बड़ा फैसला लेने की जल्दी में नहीं है। यस बैंक कि एक रिपोर्ट के मुताबिक RBI इस समय पूरी तरह से वेट एंड वॉच की स्थिति में है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से विनिर्माण क्षेत्र पर खतरे के बादल मंडराए हुए हैं।
यस बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई अभी आपूर्ति पक्ष से आ रहे महंगाई के दबाव को नजरअंदाज कर रहा है। हालांकि इस दबाव में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे साफ है कि हाल में सप्लाई साइड पर आया झटका अभी पूरी तरह उपभोक्ताओं तक स्थानांतरित नहीं हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
यस बैंक ने अपनी रिपोर्ट में इस साल के लिए थोक महंगाई दर 9 फीसदी और खुदरा महंगाई दर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों के बीच बना यह फासला बताता है कि थोक स्तर की महंगाई का असर आगे चलकर खुदरा बाजार तक पहुंच सकता है, जिसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार तेल कंपनियों के घाटे का बोझ पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर डालने से बचने की कोशिश करेगी।
जुलाई महीने की मुख्य थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 9.8 प्रतिशत रही, जो अनुमानित 9.75 प्रतिशत के करीब ही रही। जून के 9.9 प्रतिशत की तुलना में इसमें हल्की गिरावट देखी गई। हालांकि रिपोर्ट में चेताया गया है कि मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतों का दबाव अब भी बना हुआ है, जो चिंता की बात है।
उत्पादक पक्ष की बात करें तो आउटपुट पीपीआई का ट्रेंड थोक कीमतों के अनुरूप ही रहा, जबकि इनपुट पीपीआई में लगातार दूसरे महीने कमी दर्ज हुई। इसकी बड़ी वजह पेट्रोलियम और केमिकल जैसे इनपुट की कीमतों में आई नरमी रही। हालांकि जुलाई में ज्यादातर ग्लोबल कमोडिटी कीमतें स्थिर बनी रहीं, और अगस्त में भी यही ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद जताई गई है।
यस बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक इनपुट कीमतों को लेकर चिंता भले ही कुछ कम हुई हो, मगर असली सवाल यह है कि क्या यह राहत आगे भी बनी रहेगी, क्योंकि मध्य पूर्व संकट का समाधान अभी दूर नजर आ रहा है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि थोक से खुदरा महंगाई तक असर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है, और इसी वजह से यह उम्मीद बरकरार है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में किसी बदलाव को टालते हुए इंतजार करो और देखो की नीति पर ही टिका रहेगा।