राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऑगर मशीन का टूटा हुआ करीब 25 मीटर का हिस्सा बाहर नहीं आया है। अब हाथ से मलबा निकालने की तैयारी की जा रही है।
उत्तरकाशी की सिल्क्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों की जिंदगी बचाने की कोशिशें 14वें दिन भी जारी रहीं। इन मजदूरों को बाहर निकालने का इंतजार लंबा होता जा रहा है। सुरंग में ड्रिलिंग के दौरान ऑगर मशीन का ब्लेड सरियों में उलझकर टूट गया। इसके बाद ड्रिलिंग का काम रुक गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऑगर मशीन का टूटा हुआ करीब 25 मीटर का हिस्सा बाहर नहीं आया है। इस हिस्से को काटकर बाहर निकालने के लिए हैदराबाद से प्लाज्मा कटर मंगाया गया है। इसे भारतीय वायुसेना के विमान से लाया जा रहा है।
अब हाथ से मलबा निकालने की तैयारी
अधिकारियों ने बताया कि ऑगर मशीन के काम में बार-बार आ रही रुकावट के बाद अब आगे के काम मैन्युअली करने का निर्णय लिया है। पाइप लाइन के जरिए मजदूर मलबा निकालेंगे। ऐसे में श्रमिकों को 2 से 3 दिन अभी सुरंग में और गुजारने पड़ सकते हैं। इसके साथ ही अब मजदूरों को निकालने के लिए अन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि जरूरत पडऩे पर टनल के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग भी की जा सकती है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने की बात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से ऑपरेशन सिलक्यारा में आई बाधा के संबंध में जानकारी ली। सीएम ने उन्हें बताया कि इस्पात की बनी वस्तुओं के ऑगर मशीन के सामने आने से कार्य में बाधा उत्पन्न हुई है, जिसे ठीक किया जा रहा। प्रधानमंत्री ने उन्हें हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है।
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