
कोरोना महामारी के बाद जूम और गूगल मीट जैसे वर्चुअल मीटिंग प्लेटफॉर्म का प्रयोग जीवन का एक हिस्सा बन गए हैं। अब वैज्ञानिकों ने इनके उपयोग को लेकर चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों ने शोध के बाद दावा किया है कि डिजिटल बैठकें दिमाग और हृदय पर अतिरिक्त तनाव और दबाव डालती हैं। यह शोध नेचर नामक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
50 मिनट की मीटिंग से बढ़ जाती है थकान
यूनिवर्सिटी ऑफ एप्लाइड साइंसेज अपर ऑस्ट्रिया के शोधकर्ताओं के मुताबिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, आमने-सामने होने वाली बैठकों की तुलना में अधिक थकान देने वाली होती हैं। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के दौरान 35 विश्वविद्यालयों के छात्रों को सिर और सीने पर इलेक्ट्रोड जोड़कर उनके मस्तिष्क और हृदय की गतिविधियों को मापकर देखा गया। इन उपकरणों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग थकान (वीसीएफ) की जांच करने के लिए डिजाइन किया गया था। छात्रों के दिमाग और हृदय को स्कैन करने के बाद पता चला कि 50 मिनट के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सत्र में भाग लेने वाले छात्रों ने तंत्रिका तंत्र में परिवर्तन महसूस किया। इससे छात्रों को अत्यधिक थकान हो रही थी और वे चीजों पर कम ध्यान दे पा रहे थे। इसके साथ ही मस्तिष्क और हृदय में तनाव पैदा हो रहा था।
यह भी पढ़े- 26/11 के 15 साल : मुंबई में आतंकियों ने मचाया था कोहराम, जानिए अब कितनी मुस्तैद हुई सुरक्षा और क्या हैं खामियां
यह हैं उपाय
1. बार-बार ब्रेक लें।
2. आंखों पर कम तनाव के लिए 20-20-20 नियमों का पालन करें। (डिजिटल स्क्रीन का उपयोग करते समय, 20 फीट दूर की किसी चीज को देखने के लिए हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें। यह आंखों के तनाव को कम करता है।)
3. तनाव कम करने के लिए माइंडफुलनेस तकनीकों का उपयोग करें।
4. हाइब्रिड संचार मॉडल अपनाएं जो ऑनलाइन और आमने-सामने की बातचीत को जोड़ती है।
5. बैठक का समय निर्धारित करके स्क्रीन समय कम से कम करें।
यह भी पढ़ें- Fighter Jet Tejas: और चमकेगा 'तेजस' का तेज, मिग की कमी पूरी करेगा स्वदेशी लड़ाकू विमान
Published on:
26 Nov 2023, 9:05 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.