
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फोटो-IANS)
युद्ध में यूक्रेन का साथ देने वाले कुछ यूरोपियन देशों को रूस के खिलाफ बयानबाजी करने पर अमेरिका ने सख्त चेतावनी दे दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय 'पेंटागन' ने नाटो के कुछ यूरोपीय सदस्य देशों से साफ कह दिया है कि रूस के खिलाफ अब से कोई भी सार्वजनिक बयानबाजी में नहीं करनी है।
बता दें कि रूस और अमेरिका के बीच कुछ ही दिनों पहले हुए डीजल समझौते के बाद पहली बार अमेरिका ने नाटो देशों के प्रति यह लहजा अपनाया है। उसका मानना है कि रूस को लेकर लगातार आक्रामक बयान देने से यूरोप की सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिकी अधिकारियों ने लिथुआनिया, लातविया और एस्टोनिया समेत कई नाटो देशों के प्रतिनिधियों के साथ निजी बैठकों में यह संदेश दिया है। मामले की जानकारी रखने वाले चार अधिकारियों ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
अमेरिकी अधिकारियों ने यूरोपीय नेताओं और अधिकारियों से कहा है कि रूस के खिलाफ सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी बरतें। पेंटागन की ओर से यह संदेश देने वाले अधिकारियों में रक्षा नीति प्रमुख एल्ब्रिज कोल्बी भी शामिल थे।
एक अधिकारी नाम न बताने की शर्त पर खुलकर कहा कि कोल्बी ने हाल ही में बाल्टिक देश के एक अधिकारी से बातचीत में कहा कि रूस को उकसाने वाली बयानबाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यूरोप के कुछ नेता रूस को 'कोने में फंसा चूहा' बता रहे हैं, जो सही नहीं है।
सितंबर के आखिर में एस्टोनिया के प्रधानमंत्री क्रिस्टन मिचल ने भी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए इसी तरह की टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि यूक्रेन युद्ध में मुश्किलें बढ़ने के कारण रूस यूरोप में हमले करवा रहा है।
वहीं, एक अन्य यूरोपीय अधिकारी ने अमेरिकी संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका का कहना है- हम आपकी मदद कर रहे हैं, अमेरिकी सैनिक आपके साथ हैं, लेकिन ज्यादा शोर मत मचाइए।
बता दें कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन युद्ध खत्म करने के लिए रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत शुरू कराने की हर कोशिश में जुटा है। इसके लिए अमेरिका पर अब रूस पर लगे कई प्रतिबंधों में राहत देने तक को तैयार है। वहीं, यूक्रेन पर रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का दबाव भी बनाया जा रहा है।
अमेरिका की इस नीति को लेकर यूरोपीय देशों में अलग-अलग राय है। कुछ नेताओं का मानना है कि रूस के खतरे को लगातार बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने से मॉस्को को फायदा मिल सकता है।
वहीं, दूसरे नेताओं का कहना है कि जनता को रूस की सैन्य और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के बारे में खुलकर बताना जरूरी है, ताकि यूरोप अपनी रक्षा के लिए जरूरी संसाधन जुटा सके।
Updated on:
30 Oct 2026, 5:39 PM IST
Published on:
30 Oct 2026, 5:39 PM IST
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