देश में अभी महंगाई से लोगों को कुछ खास राहत मिली नही थी कि अब खुदरा महंगाई दर के आंकड़ों में बड़ा उछाल देखा गया था। पिछले साल जनवरी में जो खुदरा महंगाई दर 4.06 फीसदी थी वो इस साल जनवरी में बढ़कर 6.01 फीसदी पर पहुंच गई है। ये अकड़े आरबीआई की उम्मीद से भी ज्यादा हैं।
देश में खुदरा महंगाई दर ने जबरदस्त उछाल मारी है। पिछले 7 महीने में ये बढ़ कर अब 6.01 फीसदी पर पहुंच गई है। सरकारी की ओर से जारी डेटा के मुताबिक, पिछले महीने खाद्य उत्पादों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से खुदरा मंहगाई दर में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। जो आंकड़ा दिसंबर में 5.66 फीसदी पर था और जनवरी 2021 में 4.06 प्रतिशत पर था वो पिछले माह जनवरी में 6.01 पर पहुंच गया है। बता दें कि यह आरबीआई की ओर से सालाना आधार पर तय किए गए मुद्रास्फीति लक्ष्य से भी ज्यादा है।
मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन द्वारा सोमवार को जारी डेटा के मुताबिक मुख्य रूप से कंज्यूमर गुड्स और टेलीकॉम से जुड़ी कीमतों में उछाल की वजह से जनवरी में खुदरा महंगाई दर आरबीआई के कंफर्टेबल टार्गेट से आगे निकल गई। दिसंबर में रिवीजन के बाद CPI पर आधारित महंगाई दर (Inflation) 5.66 फीसदी पर रही थी।
कोरोना महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक चाय, कुकिंग ऑयल, दाल और अन्य वस्तुओं की कीमतें 20-40 फीसद तक चढ़ चुकी हैं। सरकार ने आरबीआई को महंगाई दर को 2-6 फीसदी के बीच सीमित रखने का लक्ष्य दिया है।
पिछले सप्ताह आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने प्रमुख नीतिगत दरों और मौद्रिक रुख में किसी तरह का बदलाव नहीं किया था।केंद्रीय बैंक ने अगले वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई दर के नरमी के साथ 4.5 फीसदी पर रहने का अनुमान जताया है।
रिजर्व बैंक ने भी महंगाई के छह फीसदी के आसपास रहने का अनुमान लगाया था। खुदरा महंगाई दिसंबर 2021 में आरबीआई के मुताबिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक Consumer Price Index (CPI) 5.59 प्रतिशत रहा था। आरबीआई ने महंगाई को 6 फीसदी का उच्चतम स्तर तय कर रखा है।हालांकि आरबीआई गवर्नर ने कहा है कि अभी किसी भी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास का मानना है कि मुद्रास्फीति का रुख अब नीचे की ओर है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक मूल्यवृद्धि और आर्थिक वृद्धि के बीच एक उचित संतुलन कायम करने का काम जारी रखेगा। दास ने कहा कि रिजर्व बैंक का मुद्रास्फीति का अनुमान ‘मजबूत’ है, लेकिन इसका रुझान नीचे की ओर है। हालांकि, इसके साथ वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का जोखिम जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि, रिजर्व बैंक कोई राय बनाने से पहले कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के एक निश्चित दायरे पर गौर करता है। गवर्नर ने कहा, ‘हमारा मुद्रास्फीति का अनुमान काफी ‘पुष्ट’ है और हम इसपर टिके हुए हैं। यदि कुछ ऐसा होता है जिसके बारे में पहले से पता नहीं है, तो आप जानते हैं। कच्चे तेल की कीमतें एक वजह हैं जिससे मुद्रास्फीति के ऊपर जाने का जोखिम बन सकता है।’
उन्होंने कहा कि मूल्य स्थिरता निश्चित रूप से हमारे दिमाग में है। इसका आशय मुद्रास्फीति के लक्ष्य पर टिके रहने से है। ‘‘रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जानता है और साथ ही उसे वृद्धि के उद्देश्य की भी जानकारी है।’’ दास ने कहा कि पिछले साल अक्टूबर से मुद्रास्फीति का रुख नीचे की ओर है। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से सांख्यकीय कारणों की वजह से विशेषरूप से तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति ऊंची दिख रही है। इसी आधार प्रभाव का असर अगले कुछ माह के दौरान भी दिखेगा।
यह भी पढ़ें-ABG Shipyard Scam: कैसे लगा 28 बैंकों को 23 हजार करोड़ का चूना, जानें सब कुछ