
Renewable Energy India: भारत में बिजली की तेजी से बढ़ती मांग के बीच कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि बिजली की खपत में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी के कारण देश को अगले दशक में स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयला बिजली क्षमता विस्तार की योजनाओं पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है। भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में प्रसाद ने कहा कि बिजली की मांग बढ़ने के साथ उसकी लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भरोसेमंद स्रोतों की जरूरत भी बढ़ती है। उनके मुताबिक, मौजूदा विस्तार योजनाओं से आगे बढ़कर 105 से 150 गीगावाट (GW) तक अतिरिक्त कोयला आधारित क्षमता की जरूरत पड़ सकती है।
पिछले साल भारत ने अनुमान लगाया था कि 2035 तक 97 GW कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी जाएगी। इससे देश की कुल स्थापित कोयला बिजली क्षमता करीब 307 GW तक पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, बिजली की खपत में अनुमान से ज्यादा बढ़ोतरी ने इन योजनाओं पर फिर से विचार करने की जरूरत पैदा की है। CEA प्रमुख के बयान से संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में बिजली की मांग पूरी करने के लिए कोयला आधारित उत्पादन क्षमता को लेकर पहले के अनुमानों से आगे जाना पड़ सकता है।
प्रसाद के अनुसार, इस साल बिजली की मांग में उल्लेखनीय तेजी आई है। रोजाना बिजली की अधिकतम मांग यानी पीक डिमांड पिछले साल के स्तर की तुलना में करीब 45 से 50 GW अधिक रही है। मानसून के दौरान कम बारिश ने भी बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। बारिश कम होने से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ, जिसके चलते मांग और आपूर्ति के बीच अंतर कम करने के लिए ताप विद्युत संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ानी पड़ी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे (kWh) हो गई। यह अगस्त 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इस दौरान कोयला आधारित बिजली संयंत्रों का उत्पादन बढ़ने के बावजूद बिजली की कमी दर्ज की गई। सितंबर में कोयला आधारित बिजली उत्पादन पिछले साल के इसी महीने की तुलना में 13.3 प्रतिशत बढ़ा। इसके उलट, जलविद्युत उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई। ये आंकड़े बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और पूरे साल आपूर्ति बनाए रखने में भारत के सामने आ रही चुनौतियों को दिखाते हैं।
CEA प्रमुख ने स्पष्ट किया कि कोयला आधारित बिजली क्षमता पर नए सिरे से ध्यान देने का मतलब यह नहीं है कि भारत अपने अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों से पीछे हट रहा है। उनके अनुसार, देश ने पिछले साल करीब 50 GW अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी थी और आने वाले वर्षों में भी हर साल 50 GW से अधिक क्षमता जोड़ने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने कहा कि बढ़ती अक्षय ऊर्जा क्षमता के बावजूद चौबीसों घंटे बिजली की मांग पूरी करने के लिए स्थिर और भरोसेमंद बिजली स्रोत जरूरी हैं।
बिजली की मांग और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए परमाणु ऊर्जा, पंप्ड-स्टोरेज जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली आपूर्ति को संतुलित करने वाली अन्य तकनीकों का विस्तार भी अहम होगा। भारत के सामने चुनौती केवल बिजली उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि बिजली ग्रिड को स्थिर रखते हुए हर समय पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की भी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में कोयला, अक्षय ऊर्जा और अन्य भरोसेमंद बिजली स्रोतों के बीच संतुलन ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।