
दिल्ली में BIMSTEC की बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा की 5 अहम पहलों को मंजूरी, Photo Source@ANI
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक में भारत और BIMSTEC के अन्य सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ी पांच अहम पहलों को मंज़ूरी दी। इनमें मानव तस्करी, ड्रग कंट्रोल, मनी लॉन्ड्रिंग, टेरर फाइनेंसिंग और गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन से जुड़े समझौते शामिल हैं।
बैठक में 'दिल्ली घोषणापत्र' को भी अपनाया गया, जिसमें बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय सुरक्षा, विश्वास और सहयोग को मजबूत करने के लिए सदस्य देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।
मंजूर की गई पहलों में मानव तस्करी के खिलाफ BIMSTEC कन्वेंशन, ड्रग कंट्रोल पर एक्शन प्लान, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए क्षमता निर्माण पर MoU, गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन की रोकथाम पर एक्शन प्लान और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का एक्शन प्लान शामिल हैं।
मानव तस्करी कन्वेंशन का मकसद तस्करी की रोकथाम, इसे दंडनीय बनाने और पीड़ितों की सुरक्षा व पुनर्वास में सहयोग बढ़ाना है। ड्रग कंट्रोल प्लान नशीले पदार्थों, साइकोट्रोपिक पदार्थों और प्रीकर्सर रसायनों की तस्करी से निपटेगा। MoU में विशेषज्ञ प्रशिक्षण, वित्तीय खुफिया, जांच, संपत्ति वसूली और प्रसार वित्तपोषण के मुकाबले में सहयोग का प्रावधान है। गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन पर प्लान स्रोतों, जोखिमों और माध्यमों की पहचान पर केंद्रित है।
घोषणापत्र में सीमा-पार आतंकवाद, टेरर फाइनेंसिंग, कट्टरपंथ, ड्रग व मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध से निपटने पर ज़ोर दिया गया। जानकारी साझा करने, आपसी कानूनी मदद, प्रत्यर्पण और क्षमता निर्माण को प्राथमिकता मिली। ऑनलाइन घोटालों में शामिल तस्करी पीड़ितों की सुरक्षा पर भी बल दिया गया और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भारत की भूमिका सराही गई। गृह मंत्रालय के अनुसार भारत ने पुलिस प्रशिक्षण, आतंकवाद-रोधी अभियानों और फोरेंसिक जांच में अपनी विशेषज्ञता साझा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने संबोधन में शाह ने आतंकवाद के प्रति भारत की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकी नेटवर्क को सुरक्षित ठिकाने न मिलें, वे सदस्य न बना सकें, प्रशिक्षण न दे सकें, धन न जुटा सकें और किसी भी हिस्से से पड़ोसी देशों के खिलाफ गतिविधियां न चला सकें।
उन्होंने सहयोग के पांच क्षेत्र गिनाए: ड्रग कंट्रोल, आतंकवाद-रोधी व कानूनी सहयोग, भगोड़े अपराधियों की वापसी, साइबर-सुरक्षा व साइबर-क्राइम जांच, और संस्थागत सहयोग व क्षमता निर्माण। गैर-कानूनी वित्तीय लेन-देन और टेरर फाइनेंसिंग के लिए उन्होंने समन्वित क्षेत्रीय दृष्टिकोण की जरूरत बताई।
Updated on:
13 Oct 2026 09:32 pm
Published on:
13 Oct 2026 08:45 pm
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