अमेरिकी कांग्रेस में एक महत्वपूर्ण और द्विदलीय बिल 'सेक्रेड एक्ट' पेश किया गया है। इसका उद्देश्य अमेरिका में बढ़ते धार्मिक घृणा अपराधों और पूजा स्थलों पर हो रहे हमलों पर लगाम लगाना है।
अमेरिका में बढ़ते धार्मिक घृणा अपराधों और पूजा स्थलों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी कांग्रेस में एक महत्वपूर्ण और द्विदलीय बिल पेश किया गया है। इस विधेयक का नाम 'सेक्रेड एक्ट' है। इस विधेयक का उद्देश्य हिंदू मंदिरों, गुरुद्वारों, मस्जिदों और चर्चों में जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
अमेरिका में पेश किए गए 'सेक्रेड एक्ट' के मुताबिक, किसी भी धार्मिक स्थल के 100 फीट (लगभग 30 मीटर) के दायरे में किसी भी प्रकार का उत्पीड़न, रास्ता रोकना, डराना-धमकाना या बाधा उत्पन्न करना अब संघीय अपराध माना जाएगा। न्यूयॉर्क के डेमोक्रेट सांसद टॉम सुओजी और ओहायो के रिपब्लिकन सांसद मैक्स मिलर द्वारा पेश यह बिल धार्मिक स्थलों के चारों ओर एक सुरक्षित 'बफर जोन' बनाने का प्रावधान करता है। इस एक्ट में सख्त सजा के प्रावधान भी शामिल हैं।
अमेरिका में पेश किए गए 'सेक्रेड एक्ट' के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर अपराधी को एक साल तक की जेल या भारी जुर्माना (या दोनों) हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर सजा बढ़कर तीन साल तक की जेल हो सकती है। बिल पीड़ितों को हमलावरों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर कर मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार भी देता है। इसके अलावा, अमेरिकी अटॉर्नी जनरल को ऐसी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाने की शक्ति प्रदान की गई है।
अमेरिका में हिंदू मंदिरों को अपवित्र करने और श्रद्धालुओं को डराने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी गई है। अब 'सेक्रेड एक्ट' होने से धार्मिक स्थलों के आसपास आपराधिक घटनाएं कम होंगी। एक्ट पेश होने पर ‘हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन’ और ‘यूनाइटेड सिख्स’ सहित प्रमुख हिंदू और सिख संगठनों ने इस बिल को मील का पत्थर बताया है।
इस कानून को यहूदी, मुस्लिम और ईसाई संगठनों का भी व्यापक समर्थन प्राप्त है। यह बिल स्पष्ट संदेश देता है कि वैचारिक मतभेद या विरोध प्रदर्शन की आड़ में किसी की आस्था और सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।यदि यह बिल पास हो जाता है तो अमेरिका में धार्मिक पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।