
पूर्व PM राजीव गांधी की हत्या के जुर्म में जेल की सजा पाने वाले ए.जी. पेरारिवलन (Image- Jansatta)
राजीव गांधी हत्याकांड में 31 साल जेल की सजा काटने वाले ए.जी. पेरारिवलन मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करेंगे। साल 2022 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिहा किए जाने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई पूरी की और अब मद्रास उच्च न्यायालय में वकील के रूप में पंजीकृत हो गए हैं। 54 साल के ए.जी. पेरारिवलन ने 27 अप्रैल 2026 को तमिलनाडु और पुडुचेरी बार एसोसिएशन में अपना नाम दर्ज कराया है। उनके नामांकन समारोह में मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी, तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल के अध्यक्ष पी.एस. अमलराज, उपाध्यक्ष एस. प्रभाकरन सहित सहित कई अधिवक्ता उपस्थित रहे।
ए.जी. पेरारिवलन ने अपनी जेल यात्रा को जीवन की बड़ी अंतर्दृष्टि बताया है। ए.जी. पेरारिवलन PTI को दिए इंटरव्यू में कहा कि वे गलत हिरासत, न्यायिक देरी और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों से संबंधित मामलों पर विशेष रूप से काम करेंगे। इंटरव्यू में पेरारिवलन ने कहा- हमारा मुख्य ध्यान उन कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने पर होगा, जिन्हें प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता।
साल 1991 में आतंकवादी संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। जब राजीव गांधी की LTTE द्वारा हत्या की गई, तब पेरारिवलन की उम्र मात्र 19 वर्ष थी। गिरफ्तारी के समय उनके परिवार को लगा था कि उनसे सिर्फ पूछताछ होगी और अगले दिन वे घर लौट आएंगे। हालांकि, उन्हें रिहा नहीं किया गया। पेरारिवलन की गिरफ्तारी के बाद उनके परिजनों को 59 दिनों तक इसकी जानकारी नहीं हुई।
पेरारिवलन पर आरोप था कि उन्होंने हत्या में इस्तेमाल बम के लिए 9 वोल्ट की बैटरी खरीदी थी। TADA अदालत ने 1998 में उन्हें दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 1999 में बरकरार रखा। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका पर 11 वर्ष की अनावश्यक देरी का हवाला देते हुए उनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। इसके बाद 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया।
जेल से रिहाई के बाद पेरारिवलन ने बेंगलुरु के डॉ. बी.आर. अंबेडकर लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री पूरी की और 2025 में अखिल भारतीय बार परीक्षा उत्तीर्ण की, अब वे वकील बन गए हैं। जिस कानूनी व्यवस्था में पेरारिवलन ने आरोपी और दोषी के रूप में अपने जीवन के 31 वर्ष बिताए, वही अब मद्रास हाई कोर्ट में वकालत करेंगे। पेरारिवलन ने तमिलनाडु मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित डिप्लोमा पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त करके उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही, उन्होंने प्लस टू परीक्षा में कैदियों के बीच प्रथम स्थान प्राप्त किया और 1200 में से 1096 अंक हासिल किए।
Updated on:
29 Apr 2026, 6:27 AM IST
Published on:
29 Apr 2026, 5:03 AM IST
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