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Salal Hydroelectric Project: चिनाब की धार से 9 राज्यों तक पहुंच रही रोशनी, 690 मेगावाट की सलाल परियोजना बनी जम्मू-कश्मीर की ताकत

Chenab River, 690 MW Hydropower: रियासी की पहाड़ियों में चिनाब का वेग सिर्फ घाटियों को नहीं चीरता, बल्कि नौ राज्यों की बिजली व्यवस्था में भी अपनी हिस्सेदारी निभाता है। करीब चार दशक पुरानी सलाल परियोजना के पीछे आखिर वह कौन-सी तकनीक है, जो नदी की धार को 690 मेगावाट की ऊर्जा में बदल देती है?
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Sep 07, 2026
Salal Hydroelectric Project
Salal Hydroelectric Project :690 मेगावाट बिजली परियोजना (फोटो सोर्स: ANI)

Salal Power Station: चारों तरफ ऊंचे पहाड़… नीचे गहरी घाटी और बीच से तेज रफ्तार में बहती चिनाब। इसी नदी के प्रवाह को नियंत्रित कर उसकी ऊर्जा को बिजली में बदल रहा है सलाल जलविद्युत परियोजना। पहाड़ों के बीच खड़ा बांध और पावर हाउस की विशाल मशीनें पानी की ताकत को बिजली में बदलने की इंजीनियरिंग का जीवंत उदाहरण हैं। सलाल की कहानी केवल बिजली उत्पादन की नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत विकास के एक महत्वपूर्ण पड़ाव की भी है। भारत-पाकिस्तान जल संधि के तहत जम्मू-कश्मीर में यह पहला जलविद्युत प्रोजेक्ट था। इसका निर्माण एनएचपीसी की ओर से किया गया।

दो चरणों में तैयार हुआ प्रोजेक्ट

सलाल को दो चरणों में विकसित किया गया। पहला चरण 1987 में कमीशन हुआ, जबकि दूसरा चरण 1993 से 1995 के बीच पूरा किया गया। सलाल पावर स्टेशन के एमडी संजय जैन ने बताया कि दोनों चरणों के पूरा होने के बाद परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 690 मेगावाट हो गई। करीब चार दशक से यह परियोजना चिनाब के पानी की ऊर्जा को बिजली में बदल रही है।

चिनाब के पानी से बिजली तक का सफर

नदी का पानी बांध के जरिए नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद जलमार्गों और सुरंगों से पानी को पावर हाउस तक पहुंचाया जाता है। तेज दबाव से पानी टरबाइन पर पड़ता है। जिससे बिजली बनती है। सलाल से उत्पादित बिजली जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, नई दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और हरियाणा तक पहुंचती है।

भारत-पाकिस्तान जल संधि से जुड़ा अहम अध्याय

सलाल परियोजना का महत्व केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान जल संधि के तहत विकसित होने वाली यह पहली जलविद्युत परियोजना थी। इसका निर्माण एनएचपीसी ने किया था। इस लिहाज से सलाल को जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर जलविद्युत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माना जाता है।

रियासी से उदय पटेल की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, पहाड़ों के बीच चिनाब की तेज धार आज भी सलाल की मशीनों को ऊर्जा देती है। करीब चार दशक बाद भी यह परियोजना इस बात की मिसाल बनी हुई है कि नदी की प्राकृतिक शक्ति को किस तरह बड़े पैमाने पर विद्युत उत्पादन में बदला जा सकता है।

Updated on:
07 Sept 2026 07:38 am
Published on:
07 Sept 2026 07:36 am