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Sanjay Kishan Kaul: सौरव दास से मुलाकात पर पूर्व जज संजय किशन कौल की दोटूक, बोले- भाषा की मर्यादा जरूरी

Supreme Court former judge: दिवाली के मौके पर हुई एक संक्षिप्त मुलाकात अब चर्चा का विषय बन गई है। पूर्व न्यायाधीश ने अपने बयान में नजदीकी संबंधों की अटकलों से दूरी बनाई और सार्वजनिक बातचीत में शब्दों के चयन पर भी सवाल उठाए।
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Updated: 28 Oct 2026, 9:03 AM IST
Sanjay Kishan Kaul Saurav Das interview
Sanjay Kishan Kaul: दिवाली पर 10 मिनट की मुलाकात, सौरव दास से संबंधों पर पूर्व जज संजय किशन कौल ने क्या कहा? (फोटो सोर्स: ANI)

Sanjay Kishan Kaul Saurav Das Interview: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने नागरिक समाज और पब्लिक डिबेट में इस्तेमाल होने वाली भाषा को लेकर एक जरूरी बात कही है। सौरव दास के साथ अपने रिश्ते पर उठे सवालों के जवाब में उन्होंने साफ कहा कि उनकी मुलाकात को मेंटरशिप या गाइडेंस जैसा नहीं समझना चाहिए। कौल ने बातचीत में कहा कि लोगों को बोलचाल में संयम और शालीनता रखनी चाहिए। आजकल जो भाषा इस्तेमाल होती है, वो कई बार उनकी पीढ़ी के लोगों को चुभ जाती है।

Sanjay Kishan Kaul Saurav Das Interview: संजय किशन कौल ने क्या कहा?

भारत के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश संजय किशन कौल ने सौरव दास के साथ अपने जुड़ाव को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। समाचार एजेंसी ANI (एशियन न्यूज इंटरनेशनल) को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि सौरव दास से उनकी मुलाकात लगभग एक साल पहले हुई थी। कौल के मुताबिक, दास उस समय पत्रकार थे और उनसे उनकी मुलाकात एक-दो बार ही हुई थी।

कौल ने बताया कि दिवाली के आसपास दास ने उनसे मिलने का आग्रह किया था। उस समय वह किसी दूसरे कार्यक्रम के लिए जा रहे थे। उन्होंने कुछ देर के लिए वहां पहुंचने की बात कही और अपनी पत्नी से भी कहा कि वह केवल दस मिनट के लिए रुकेंगे, कॉफी पीकर वापस आ जाएंगे।

पूर्व न्यायाधीश ने इस मुलाकात को सामान्य परिचय तक सीमित बताते हुए स्पष्ट किया कि वह सौरव दास के मेंटर नहीं थे। उनके अनुसार, एक-दो मुलाकातों के आधार पर उनके संबंधों को किसी औपचारिक सलाहकार या मार्गदर्शक की भूमिका से जोड़ना सही नहीं होगा।

भाषा के इस्तेमाल पर क्यों जताई चिंता?

इंटरव्यू के दौरान कौल ने बातचीत की शैली पर अपनी राय खुलकर रखी। उन्होंने याद किया कि मुलाकातों के दौरान उन्होंने सौरव दास को भाषा में थोड़ी संयमता बरतने की सलाह दी थी। कौल का मानना है कि असहमति जताने या विरोध करने के लिए शब्दों का चयन सोचना जरूरी है बस बोलने से काम नहीं चलता, बात को कहने का तरीका भी मायने रखता है।

अपनी पीढ़ी के संवाद के तौर-तरीके का जिक्र करते हुए कौल ने कहा कि उनके समय में सार्वजनिक बातचीत ज़्यादातर सभ्य भाषा में होती थी। उन्होंने माना कि आजकल जो अभिव्यक्तियां चलन में हैं, वो कई बार उनकी पीढ़ी के लोगों को अखर जाती हैं, शायद चुभ भी जाती हैं।

ये बातें ऐसे वक्त में और अहम हो जाती हैं, जब राजनीतिक बहस हो, सामाजिक आंदोलन हों, या किसी सार्वजनिक मंच पर तीखी भाषा का इस्तेमाल ज़्यादा दिख रहा है। कौल ने आम विवाद पर कोई राय देने से बचते हुए अपनी ही व्यक्तिगत सोच सामने रखी।

सलाह देने से कौल ने खुद को दूर रखा

संजय किशन कौल ने साफ कर दिया कि वह सौरव दास या उसके साथ जुड़े लोगों को सलाह देने की भूमिका नहीं निभाना चाहते। उनका कहना है कि अगर वो ऐसा करते, तो बात को इस तरह लिया जा सकता था जैसे वे किसी को दिशा दे रहे हैं जबकि उनका इरादा बस बातचीत करने का था।

इस टिप्पणी से साफ है कि कोई निजी बातचीत या सामान्य मुलाकात को किसी औपचारिक समर्थन या सलाह के तौर पर पेश करना सही नहीं है।

Updated on:
28 Oct 2026, 9:03 AM IST
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