
पीएम नरेंद्र मोदी(फोटो-ANI)
SCO forum New Delhi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन में जिस सांस्कृतिक और सभ्यतागत संवाद का प्रस्ताव रखा था, वह अब नई दिल्ली में हकीकत बनने जा रहा है। 20 और 21 नवंबर को भारत SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम की मेजबानी करेगा। एक मेजबान देश के प्रोटोकॉल और नियमों का पालन करते हुए भारत ने पाकिस्तान के राष्ट्रीय विरासत और संस्कृति मंत्री औरंगजेब खान खिची को भी इस बहुपक्षीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने तियानजिन में इस संवाद की शुरुआत करने का सुझाव दिया था। इसका मकसद यूरेशियाई सदस्य देशों के लोगों के बीच संबंधों को गहरा करना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना और प्राचीन सभ्यताओं की साझा विरासत, कला और साहित्य को प्रदर्शित करना था। इसके बाद, 20 अक्टूबर 2026 को ताजिकिस्तान के दुशान्बे में आयोजित SCO की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की 25वीं बैठक को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि भारत नवंबर के तीसरे सप्ताह में नई दिल्ली में इस प्रतिष्ठित मंच की मेजबानी करेगा।
पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान के किसी वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को निमंत्रण भेजा है। इससे पहले मई 2023 में गोवा में आयोजित SCO विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक के दौरान भारत ने पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो की मेजबानी की थी। पठानकोट और उरी हमलों के बाद से भारत ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ सभी द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से विराम लगा रखा है। हालांकि, वैश्विक नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार, शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय मंचों में भागीदारी जारी है।
इस मंच के आयोजन के लिए प्रशासनिक ढांचा पिछले महीने तब तैयार किया गया, जब विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और SCO के राष्ट्रीय समन्वयक आलोक डिमरी के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचा। अपनी यात्रा के दौरान, प्रतिनिधिमंडल ने कनेक्टिविटी और व्यापार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
डिमरी ने स्पष्ट किया था कि किर्गिस्तान (बिश्केक) और चीन (तियानजिन) से गुजरते हुए SCO अब इस उपमहाद्वीप में पहुंचा है, जहां यूरेशिया और एशिया की प्राचीन सभ्यताएं साझा मंच पर एक साथ आ रही हैं। रूस, चीन, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस सहित समूह के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि इस ऐतिहासिक फोरम में शिरकत करेंगे।
Updated on:
28 Oct 2026, 7:07 AM IST
Published on:
28 Oct 2026, 7:07 AM IST
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