एक रिपोर्ट के मुताबिक एसबीआई ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अकाउंट होल्डर्स से वसूले गए 164 करोड़ रुपए नहीं लौटाए हैं। बैंक ने खाताधारकों से ये रुपए डिजिटल पेमेंट के एवज में वसूले थे।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर देशवासी को बैंक से जोड़ने के लिए पीएम जन-धन योजना का शुभारंभ किया था। वहीं इस योजना के तहत देशवासियों ने बड़ी संख्या में खाते खुलवाए थे। अब इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई ने एक रिपोर्ट में जन-धन खाते को लेकर एक बड़ा दावा किया है। बताया गया कि देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने अप्रैल, 2017 से लेकर दिसंबर, 2019 के दौरान प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अकाउंट होल्डर्स से वसूले गए 164 करोड़ रुपए नहीं लौटाए हैं।
डिजिटल पेमेंट की एवज में वसूले थे पैसे
रिपोर्ट के मुताबिक खाताधारकों से ये रुपए डिजिटल पेमेंट के एवज में वसूले गए थे। बताया गया कि एसबीआई ने अप्रैल, 2017 से सितंबर, 2020 के बीच जन-धन योजना के तहत खोले गए साधारण बचत खातों से यूपीआई एवं रुपए लेनदेन के एवज में कुल 254 करोड़ रुपए से अधिक शुल्क वसूला था। इसमें प्रति लेनदेन बैंक ने अकाउंट होल्डर्स से 17.70 रुपए का शुल्क शामिल था।
जानकारी के मुताबिक सरकार ने एसबीआई को यह शुल्क खाताधारकों को वापस करने का निर्देश भी दिया था। इसके बावजूद खाताधारकों को अभी तक सिर्फ 90 करोड़ रुपए ही लौटाए गए हैं, वहीं अभी 164 करोड़ रुपए की राशि लौटाना बाकी है। वहीं इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए भेजे गए सवालों का भी एसबीआई की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट में बताया गया कि एसबीआई ने अन्य बैंकों से अलग जन-धन खाताधारकों से डिजिटल लेनदेन करने पर शुल्क वसूलना शुरू कर दिया था। एसबीआई ने खाताधारकों पर एक महीने में चार से अधिक निकासी करने पर 17.70 रुपए प्रति लेनदेन का शुल्क लगाया था। एसबीआई के इस रवैये को लेकर अगस्त, 2020 में वित्त मंत्रालय से शिकायत की गई थी, जिस पर बैंक से सभी खाताधारकों से वसूली गई रकम लौटाने का निर्देश दिया गया था।