केंद्र सरकार जल्द ही नकली बीज बेचने वालों के खिलाफ सख्ती बरतने की तैयारी में है। क्या है सरकार का प्लान? आइए जानते हैं।
केंद्र सरकार आगामी बजट सत्र के दूसरे चरण (9 मार्च-2 अप्रैल) में संसद में नया बीज विधेयक पेश करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक देश में बीज नियमन से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे में व्यापक बदलाव करेगा। नए कानून के लागू होने के बाद फर्जी या बिना पंजीकरण वाले बीजों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। प्रस्तावित कानून मौजूदा बीज अधिनियम 1966 का स्थान लेगा, जो फिलहाल अधिसूचित बीज किस्मों को ही नियंत्रित करता है।
केंद्र सरकार का प्रस्तावित बीज विधेयक, 2025 कृषि-बीज क्षेत्र में लगभग 6 दशक में सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य बीज की गुणवत्ता, पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना है। हालांकि सवाल यह है कि क्या यह किसानों के हित सुरक्षित रख पाएगा या इससे छोटे उत्पादकों और पारंपरिक स्थानीय तंत्र पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा? इसके जवाब के लिए नए बीज विधेयक का इंतज़ार करना होगा।
बताया जा रहा है कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अंतर-मंत्रालयी परामर्श और विधिक जांच पूरी कर ली है। इसका मसौदा केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसे बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद में पेश किया जा सकता है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब देश का बीज बाजार लगभग 40,000 करोड़ रुपए का आंका गया है और वर्ष 2024-25 के लिए देश की वार्षिक बीज आवश्यकता 48.20 लाख टन अनुमानित है।
सरकार का मानना है कि तेज़ी से बढ़ते और तकनीक-आधारित इस क्षेत्र के लिए एक सशक्त कानूनी ढांचा ज़रूरी है, जिससे गुणवत्ता को सुनिश्चित किया जा सके और नकली बीजों पर रोक लगाई जा सके।
इस बीज विधेयक के आने के बाद स्थानीय और पारंपरिक किस्मों के पंजीकरण की प्रक्रिया जटिल बनी तो छोटे उत्पादकों के लिए बाधा बन सकती है। छोटे डीलर्स/नर्सरी के लिए डिजिटल अनुपालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। डेटा अपलोड और रजिस्ट्रेशन में त्रुटि होने पर जुर्माना का जोखिम होगा। वहीं डिजिटल अवसंरचना की कमी वाले इलाकों में लागू करना कठिन होगा।
सरकार के नए बीज विधेयक के आने के बाद नकली बीज की बिक्री पर सख्त सज़ा का प्रावधान होगा। इसके तहत 10 लाख से 30 लाख रुपए तक जुर्माना और बार-बार ऐसा करते पाए जाने पर 3 साल तक की जेल की सज़ा और पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान लागू हो सकता है।