
Hanuman Chalisa Controversy: महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों काफी भूचाल आया हुआ है। हनुमान चालीसा को लेकर चल रहा विवाद अब बीजेपी बनाम महाविकस आघाडी बनता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। इस बीच बीजेपी के कुछ नेता राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं । अब इस विवाद में NCP प्रमुख शरद पवार की एंट्री हुई है। शरद पवार ने देवेन्द्र फडणवीस पर सीधा हमला किया है और कहा है कि वो चुनाव से पहले सत्ता में आना चाहते थे लेकिन ये हो नही सका तो परेशान हैं।
भाजपा की राष्ट्रपति शासन की मांग के बारे में पूछे जाने पर पवार ने पुणे में मीडिया से बातचीत में कहा, "सत्ता में आने के बाद लोग परेशान हो जाते हैं। हर कोई मेरे जैसा नहीं होता। 1980 में मेरी सरकार बर्खास्त कर दी गई। यह जानकारी मुझे मुख्य सचिव ने दोपहर 12.30 बजे दी। फिर मैंने तीन-चार सहयोगियों को बुलाया और अपना सामान पैक किया। सुबह सात बजे दूसरी जगह गए, सरकारी गाड़ी से निकले। उस दिन इंग्लैंड और भारत का मैच था। मैच देखने के लिए सुबह 10 बजे वानखेड़े गए और पूरे दिन मैच का लुत्फ उठाया।"
सत्ता आती है और जाती है, इसमें किस बात की परेशानी
शरद पवार ने आगे कहा, "सत्ता आती है और जाती है, ऐसे में परेशान होने का कोई कारण नहीं है, लेकिन इस वक्त कुछ लोग काफी परेशान हैं। अब ऐसे में उन्हें दोष नहीं दिया जा सकता क्योंकि उन्होंने घोषणा की थी कि वो चुनाव से पहले सत्ता में आएंगे। अब परेशानी ये है कि ऐसा नहीं हुआ, लेकिन आशा करते हैं कि जल्द ही माहौल सही हो जाए।”
राष्ट्रपति शासन लगाने पर क्या बोले शरद पवार?
इस सवाल पर कि क्या किरीट सोमैया दिल्ली में शिकायत दर्ज कराने गए थे, शरद पवार ने कहा, "राष्ट्रपति शासन लगाने की बात हो रही है, लेकिन कोई असर नहीं हो रहा है। कोल्हापुर ने कहा है कि अगर चुनाव होते हैं तो परिणाम क्या होंगे। इसलिए मुझे नहीं लगता कि कोई इतना आगे जाएगा।"