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India Oil Import: पश्चिम एशिया संकट के बीच 41 देशों से कच्चा तेल खरीदेगा भारत, MEA बोला- ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

India Energy Security: पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए कच्चे तेल के आयात स्रोत 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए हैं। LNG के स्रोत भी 6 से बढ़कर 15 देश हुए।
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भारत

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Anurag Animesh

Aug 11, 2026

India crude oil import

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल(फोटो-IANS)

India Crude Oil Import: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से तेल आयात करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। इसका मकसद किसी एक देश, क्षेत्र या ट्रांजिट रूट पर निर्भरता कम करना और 140 करोड़ आबादी की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा का आधार देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारत अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा हासिल करने पर ध्यान दे रहा है।

27 से बढ़कर 41 देशों से कच्चा तेल आयात

भारत ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में बड़ा विविधीकरण किया है। ईरान युद्ध शुरू होने और होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की स्थिति के बाद भारत ने कच्चे तेल के आयात के लिए देशों की संख्या 27 से बढ़ाकर 41 कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस निर्यात इसी रास्ते से गुजरते हैं। हालांकि, इस दौरान रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात भी काफी बढ़ा है। जुलाई में रूस से आने वाला तेल भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक रहा।

LNG के लिए भी बढ़ाए आयात के स्रोत

भारत ने केवल कच्चे तेल तक ही अपनी रणनीति सीमित नहीं रखी है। ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए देश ने एलएनजी गैस के आयात के स्रोत भी बढ़ाए हैं। पहले भारत छह देशों से एलएनजी आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 15 देश हो गई है। इनमें अमेरिका भारत के एलएनजी आयात का एक प्रमुख स्रोत बन गया है।

जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है भारत

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच भारत के लिए सप्लाई चेन को मजबूत रखना बेहद अहम है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अलग-अलग देशों और मार्गों से ऊर्जा आयात करने की रणनीति से किसी एक देश, क्षेत्र या ट्रांजिट रूट पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। इससे अचानक होने वाली सप्लाई बाधाओं और बाजार में उतार-चढ़ाव से निपटने की क्षमता भी बढ़ेगी।