केरल विधानसभा चुनाव से पहले शशि थरूर का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि राज्य में मुकाबला एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही रहेगा, जबकि भाजपा की भूमिका सीमित है। भाजपा के लिए एक-दो सीट जीतना भी बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।
Kerala Assembly election 2026: केरल में अगले महीने विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसके लिए सभी पार्टियां चुनावी प्रचार में लगी हुई है। साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। कांग्रेस के एक बड़े नेता दावा कर दिया है कि भाजपा अपना खाता भी नहीं खोल पाएगी। एक बातचीत में शशि थरूर ने भाजपा की स्थिति पर खुलकर अपनी राय रखी। उनका कहना है कि केरल में भाजपा अभी उस स्तर पर नहीं पहुंची है जहां वह सत्ता की दौड़ में खुद को मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर सके। उन्होंने थोड़ा हल्के अंदाज में यह भी कहा कि अगर भाजपा एक-दो सीट भी जीत लेती है, तो वही उसके लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
थरूर का तर्क है कि राज्य की राजनीति की बुनियाद ही अलग है। यहां चुनावी लड़ाई पारंपरिक तौर पर वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के बीच ही होती आई है। भाजपा की मौजूदगी जरूर बढ़ी है, लेकिन वह अभी निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में नहीं दिखती। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि भाजपा को पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। चुनाव में हर वोट की अहमियत होती है, और छोटे-छोटे अंतर ही कई बार बड़ा फर्क पैदा कर देते हैं। इसलिए कांग्रेस उसे हल्के में लेने की गलती नहीं कर रही।
थरूर ने भाजपा के वोट प्रतिशत पर भी ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, पिछले कई सालों में भाजपा का वोट शेयर जरूर बढ़ा है। वोट प्रतिशत करीब 6 प्रतिशत से बढ़कर 12-13 प्रतिशत तक पहुंचा है। लोकसभा चुनावों में यह आंकड़ा 19 प्रतिशत तक गया, लेकिन विधानसभा चुनाव आते ही फिर वही पुरानी सीमा के आसपास लौट आता है। इससे साफ संकेत मिलता है कि भाजपा को अभी भी केरल में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लंबा रास्ता तय करना है। वहीं दूसरी ओर, राज्य में असली टक्कर एक बार फिर एलडीएफ और यूडीएफ के बीच ही होने के आसार नजर आ रहे हैं।
केरल के साथ-साथ पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुदुचेरी और तमिलनाडु में भी चुनाव होने हैं। केरल में 9 अप्रैल को चुनाव होना है। एक ही फेज में राज्य में चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे। चुनाव के परिणाम 04 मई को जारी किये जाएंगे। इसी दिन बाकि सभी राज्यों के नतीजे भी आ जाएंगे।