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Shehzad Poonawalla: शहजाद पूनावाला का बड़ा यू-टर्न! कांग्रेस में लौटने को तैयार, मगर रख दी ऐसी शर्त कि मच गया सियासी घमासान

Shehzad Poonawalla BJP Resignation: शहजाद पूनावाला ने बताया कि राजनीति में सक्रिय रहने के बावजूद नियमित आमदनी की व्यवस्था नहीं होती, जबकि रोजमर्रा की जिम्मेदारियां अपनी जगह कायम रहती हैं। इसी वजह से वह निजी क्षेत्र में लौटने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस को लेकर उनका बयान पुराने राजनीतिक रिश्ते और मौजूदा विचारधारा के बीच दिलचस्प टकराव सामने लाता है।
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Aug 19, 2026
Shehzad Poonawalla
Shehzad Poonawalla : भाजपा से इस्तीफे के बाद शहजाद पूनावाला का बड़ा खुलासा, बोले- कांग्रेस में आऊंगा, मगर...(फाइल फोटो- एएनआई)

Shehzad Poonawalla Congress: भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद समेत पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने वाले शहजाद पूनावाला ने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर तस्वीर कुछ हद तक साफ कर दी है। आर्थिक और निजी परिस्थितियों का हवाला देकर भाजपा से दूरी बनाने वाले पूनावाला ने कांग्रेस में लौटने के सवाल पर ऐसा जवाब दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को एक ऐसी शर्त से जोड़ दिया, जिसे पूरा करना पार्टी के लिए बेहद मुश्किल माना जाएगा।

भाजपा छोड़ने की वजह क्या है?

शहजाद पूनावाला ने भाजपा के प्रवक्ता सहित संगठन से जुड़े अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पार्टी ने अभी तक उनके इस्तीफे को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। पूनावाला ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। उनके मुताबिक वह वर्ष 2024 से ही अपने भविष्य को लेकर इस विकल्प पर विचार कर रहे थे।

NDTV से बातचीत में शहजाद पूनावाला ने बताया कि राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान आर्थिक चुनौतियां लगातार बनी रहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक दल आम तौर पर अपने कार्यकर्ताओं को नियमित वेतन नहीं देते। ऐसे में घर का किराया और दूसरे निजी खर्च चलाने के लिए आय का स्थायी स्रोत जरूरी है।

पूनावाला ने इसी संदर्भ में बताया कि मकान मालिक यह देखकर किराया माफ नहीं कर देता कि किरायेदार किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक महीने की शुरुआत में किराया देना ही पड़ता है। यही वजह है कि वह अब निजी क्षेत्र यानी सर्विस सेक्टर में वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं।

'राजनीति नौकरी नहीं है', पूनावाला ने समझाया अपना फैसला

पूनावाला ने अपने फैसले को केवल भाजपा तक सीमित नहीं बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक दल किसी व्यक्ति को नौकरी देने के लिए नहीं होते। कोई व्यक्ति विचारधारा, किसी नेता के प्रति समर्थन या संगठन के प्रति जुड़ाव के कारण राजनीति में आता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा से जुड़ने के पीछे उनके लिए ये तीनों पहलू महत्वपूर्ण रहे। यानी उनका इस्तीफा वैचारिक मतभेद के सीधे तौर पर नहीं, बल्कि आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

यही बात उनके फैसले को राजनीतिक रूप से दिलचस्प बनाती है। एक तरफ उन्होंने संगठन के पदों से हटने का निर्णय लिया, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की विचारधारा के प्रति अपना समर्थन जारी रखने की बात कही है।

कांग्रेस में लौटने के सवाल पर क्या बोले?

शहजाद पूनावाला से जब कांग्रेस में शामिल होने की संभावना को लेकर सवाल किया गया तो उनका जवाब भी सुर्खियों में आ गया। उन्होंने कांग्रेस में जाने की संभावना को पूरी तरह खारिज करने के बजाय एक बेहद कड़ी शर्त रख दी।

उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को पार्टी से हटाना होगा। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कार्यों को लेकर कांग्रेस से माफी मांगने की शर्त भी रखी।

जाहिर है, यह बयान सामान्य राजनीतिक वापसी के संकेत के बजाय एक तंज और राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर ज्यादा देखा जा रहा है। फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि कांग्रेस इन शर्तों पर विचार कर रही है।

कांग्रेस से भाजपा तक का सफर भी रहा चर्चा में

पूनावाला का राजनीतिक सफर इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बनाता है। वह कांग्रेस से जुड़े रहे थे और वर्ष 2021 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद वह भाजपा के मुखर प्रवक्ताओं में गिने जाने लगे।

भाजपा में रहते हुए वह कांग्रेस और गांधी परिवार पर लगातार तीखे हमले करते रहे। ऐसे में अब कांग्रेस में वापसी को लेकर उनकी शर्त वाला बयान स्वाभाविक रूप से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

उनका ताजा रुख यह भी दिखाता है कि पद छोड़ने के बावजूद भाजपा के प्रति उनका वैचारिक झुकाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

'मोदी से बड़ा नेता नहीं हुआ', भाजपा को लेकर क्या कहा?

पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना समर्थन दोहराते हुए कहा कि वह वैचारिक रूप से उनके साथ बने रहेंगे। उन्होंने भाजपा को वर्तमान समय में देश की सबसे अच्छी पार्टी बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करने के बाद उनके किसी दूसरी पार्टी में जाने की संभावना पर सवाल उठाना स्वाभाविक है। उनके बयान का संकेत साफ है कि संगठनात्मक भूमिका खत्म होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के प्रति उनका राजनीतिक समर्थन जारी रह सकता है।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि उनका मौजूदा फैसला भाजपा की विचारधारा को छोड़ने के बजाय अपनी व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर सामने आ रहा है।

इस्तीफे में भी आर्थिक और निजी परिस्थितियों का जिक्र

पूनावाला ने अपने इस्तीफे में भी आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को महत्वपूर्ण वजह बताया था। उन्होंने कहा था कि हाल की घटनाओं और पहले से साझा की गई परिस्थितियों ने उन्हें अपने पुराने निर्णय पर कायम रहने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने निजी क्षेत्र में जाने की अपनी योजना का उल्लेख करते हुए यह भी कहा कि वह जहां और जिस रूप में संभव होगा, प्रधानमंत्री मोदी तथा भाजपा के दृष्टिकोण और कार्यों का समर्थन करते रहेंगे।

यानी फिलहाल उनकी प्राथमिकता सक्रिय राजनीतिक पद से हटकर आय का स्थायी जरिया तलाशना दिखाई देती है।

2024 से चल रही थी तैयारी

पूनावाला के मुताबिक भाजपा छोड़ने का विचार उनके मन में अचानक नहीं आया। वह लंबे समय से इस विषय पर सोच रहे थे और 2024 से ही इस दिशा में विचार कर रहे थे।

उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने भाजपा छोड़ने की संभावना पर गंभीरता से विचार किया, तब कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया था। हालांकि, उन्होंने अपने सामने मौजूद आर्थिक और व्यक्तिगत चुनौतियों को पहले ही संबंधित लोगों के सामने रखा था।

इस पूरे घटनाक्रम से इतना जरूर स्पष्ट है कि उनका इस्तीफा किसी एक दिन की राजनीतिक नाराजगी का परिणाम नहीं बताया जा रहा।

कांग्रेस में जाने को लेकर रखी गई शर्तें यह संकेत देती हैं कि तत्काल उनकी किसी राजनीतिक पाला बदलने की योजना नहीं दिखती। वह खुद भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति वैचारिक समर्थन की बात कह चुके हैं।

Updated on:
19 Aug 2026 11:52 am
Published on:
19 Aug 2026 11:52 am