राष्ट्रीय

18 से 34 साल की उम्र में हैं… तो हो जाइए सावधान! भारत में युवाओं के मेंटल हेल्थ को लेकर चौंकाने वाला आकड़ा आया सामने

Indian Youth Mental Health Report: ग्लोबल माइंड हेल्थ-2025 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारतीय युवा मेंटल हेल्थ में पिछड़ गए हैं। इसकी वजह भी सामने आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक…

2 min read
Feb 27, 2026
रिपोर्ट: भारतीय युवाओं में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का चलन। मानसिक स्वास्थ्य के मामले में दुनिया के 84 देशों में 60वें स्थान पर भारत के युवा। (इमेज सोर्स: चैट GPT AI जनरेटेड)

Youth Mental Health Report: भारत में 18 से 34 साल की उम्र के युवा बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के मामले में दुनिया के 84 देशों में 60वें स्थान पर हैं। यह खुलासा ग्लोबल माइंड हेल्थ-2025 की रिपोर्ट में हुआ है। इसके अनुसार, इन युवाओं का माइंड हेल्थ क्वोशेंट (एमएचक्यू) स्कोर महज 33 है। वहीं, 55 साल से ऊपर के भारतीयों का स्कोर 96 है और वे वैश्विक रैंकिंग में 49वें स्थान पर हैं। यह रिपोर्ट सैपियन लैब्स के ग्लोबल माइंड प्रोजेक्ट के तहत तैयार की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि बचपन से ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड पैकेज्ड खाना और परिवार से दूरी युवाओं की मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल रहे हैं। भारत में औसतन 16.5 साल की उम्र से युवा स्मार्टफोन चला रहे हैं। भारत स्मार्टफोन एक्सपोजर के मामले में 84 देशों में 71वें स्थान पर है। वैश्विक स्तर पर, 18 से 34 वर्ष की उम्र में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 41% युवा गंभीर मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें

मशहूर अभिनेत्री ने सरकार पर ठोका 9 करोड़ रुपए का मुकदमा, लगाया गंभीर आरोप, बोलीं- अब वह चुप नहीं बैठूंगी…

भारतीय युवाओं में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का चलन

  • 18 से 34 वर्ष की उम्र के 44% युवा रोज या हफ्ते के अधिकतर दिन प्रोसेस्ड फूड खाते हैं।
  • 55 साल या उससे अधिक उम्र के केवल 11% लोग ही ऐसा खाना खाते हैं।
  • यानी बुजुर्गों की तुलना में युवा चार गुना ज्यादा प्रोसेस्ड फूड पर निर्भर हैं।
  • पिछले 15 वर्षों में भारत अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के लिए दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक बन गया है।
  • इससे मोटापा, डायबिटीज और दिल की बीमारी का खतरा

परिवार से जुड़ाव है सुरक्षा कवच

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में पारिवारिक जुड़ाव और आध्यात्मिकता अभी भी युवाओं की मानसिक सेहत की रक्षा करते हैं, लेकिन इनमें भी गिरावट आ रही है। पारिवारिक करीबी के मामले में भारत दोनों आयु वर्गों में 28वें स्थान पर है। हालांकि, एक्सपर्ट कहते हैं कि भारत के आज के युवा वैश्विक स्तर पर दिखने वाले रुझानों से अलग नहीं हैं। उन पर भी दूसरे देशों के युवाओं की तरह इंटरनेट, बदलती जीवनशैली का असर पड़ा है।

कैसे तैयार हुई रिपोर्ट?

दुनियाभर में 10 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा के आधार पर यह रिपोर्ट बनाई गई।

78,093 भारतीयों पर यह सर्वे किया गया
29,594 लोग 18-34 आयु वर्ग के थे

24,088 लोग 55 साल से ऊपर के थे

क्या है एमएचक्यू स्कोर?

एमएचक्यू एक ऐसा पैमाना है जो इंसान की भावनात्मक, सामाजिक, मानसिक और शारीरिक क्षमताओं को मापता है। यह बताता है कि कोई व्यक्ति अपने जीवन, काम और रिश्तों को कितनी अच्छी तरह संभाल सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सैपियन लैब्स की संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक तारा थियागराजन का कहना है, 'यह सिर्फ चिंता या डिप्रेशन नहीं है। युवाओं में भावनाओं को काबू करने, ध्यान केंद्रित करने, रिश्ते बनाए रखने और तनाव से उबरने की मूल क्षमता कमजोर हो रही है।'

ये भी पढ़ें

फॉलोअर्स के मामले में पीएम मोदी का नहीं है कोई तोड़, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी हो गए पीछे

Also Read
View All

अगली खबर