
Voter List Revision: देश में एक बार फिर वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। ताजा घटनाक्रम में तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष (Sagarika Ghose) ने दावा किया है कि इस प्रक्रिया को कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में प्रभावित किया जा रहा है।
सागरिका घोष ने ANI से बातचीत में कहा कि गैर-NDA विपक्षी दल इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट हैं और SIR प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं साझा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के इस विशेष पुनरीक्षण का इस्तेमाल चुनावी संतुलन को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है। विपक्ष का कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी पुनर्विचार की आवश्यकता है।
जानकारी के अनुसार, 23 विपक्षी दलों ने मिलकर भारत के मुख्य न्यायाधीश धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (Dhananjaya Y. Chandrachud) को एक संयुक्त पत्र भेजा है। इस पत्र में SIR प्रक्रिया और संपूर्ण चुनावी व्यवस्था की न्यायिक निगरानी की मांग की गई है। इस पहल में आम आदमी पार्टी (AAP) और DMK जैसे प्रमुख दल भी शामिल बताए जा रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और TMC के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने भी इस पहल की पुष्टि की है।
सागरिका घोष ने विपक्षी एकता पर जोर देते हुए कहा कि गैर-NDA दल इस मुद्दे पर एक साझा मंच पर हैं। उनके अनुसार, यह पहली बार है जब इतने बड़े स्तर पर विपक्षी दलों ने चुनावी प्रक्रिया की निगरानी के लिए न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि 8 जून को हुई एक बैठक में 21 विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संयुक्त रणनीति बनाने का निर्णय लिया था, जो अब बढ़कर 23 दलों तक पहुंच चुका है।
विपक्ष ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। साथ ही प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भी आलोचना की गई है। सागरिका घोष का कहना है कि ऐसे बड़े और संवेदनशील कानूनों को व्यापक सहमति और गहन परामर्श के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए।
इसी बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति भी गरमाती नजर आ रही है। हाल ही में राज्य विधानसभा में दो अहम विधेयक पारित किए गए हैं।
इन विधेयकों को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस जारी है।