Fertility Rate Report: भारत समेत दुनिया भर में तेजी से गिर रही जन्म दर को लेकर नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। विशेषज्ञों ने स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को रिश्तों में बढ़ती दूरी और घटती प्रजनन दर की बड़ी वजह बताया है।
Smartphones Driving Sharp Decline in Global Birth Rates: दुनिया भर में तेजी से गिरती जन्म दर अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है। जनसांख्यिकी विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया के अधिकांश देशों में प्रजनन दर लगातार नीचे जा रही है और अब इसके पीछे सिर्फ आर्थिक कारण ही नहीं, बल्कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया जैसी डिजिटल आदतों को भी बड़ी वजह माना जा रहा है।
नई रिपोर्ट्स के अनुसार, 195 देशों में से दो-तिहाई से अधिक देशों में प्रजनन दर 2.1 के 'रिप्लेसमेंट रेट' से नीचे पहुंच चुकी है। इसका मतलब है कि बिना प्रवासन के इन देशों की आबादी को स्थिर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। कई देशों में प्रति महिला बच्चों की औसत संख्या अब दो से भी कम हो चुकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में भी पिछले तीन दशकों में प्रजनन दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। पहले जहां प्रति महिला औसतन 3.4 बच्चे होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर करीब 2.0 तक पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों और पारंपरिक समाजों में भी तेजी से दिखाई दे रहा है। भारत के अलावा मेक्सिको, ब्राजील, ईरान और ट्यूनीशिया जैसे देशों में भी जन्म दर अमेरिकी स्तर से नीचे चली गई है। दक्षिण कोरिया जैसे देशों में स्थिति और गंभीर हो चुकी है, जहां प्रजनन दर लगभग शून्य के करीब पहुंचने लगी है।
अब तक गिरती जन्म दर के लिए महंगे घर, करियर, आर्थिक दबाव और देर से शादी जैसे कारणों को जिम्मेदार माना जाता था। हालांकि नई रिसर्च में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को भी बड़ा कारण बताया गया है।
यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन क्षेत्रों में 4जी और हाई-स्पीड इंटरनेट सबसे पहले पहुंचा, वहां जन्म दर में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन ने युवाओं की सामाजिक जिंदगी को स्क्रीन तक सीमित कर दिया है, जिससे रिश्तों और परिवार बनाने की प्रवृत्ति कमजोर पड़ रही है।
शोध में बताया गया है कि 2007 के बाद स्मार्टफोन के तेजी से फैलाव के साथ जन्म दर में गिरावट का पैटर्न साफ दिखाई देने लगा। अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में युवाओं की जन्म दर तेजी से घटी। इसके बाद 2012 में यही ट्रेंड मेक्सिको और इंडोनेशिया में भी देखने को मिला।
2015 के बाद ईरान, मिस्र और सेनेगल जैसे पारंपरिक समाजों में भी जन्म दर में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञ इसे वैश्विक 'सांस्कृतिक बदलाव' से जोड़कर देख रहे हैं।
फिनलैंड की जनसांख्यिकी विशेषज्ञ अन्ना रोटकिर्च के मुताबिक, सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल करने वाले युवाओं में रिश्तों से दूरी और यौन निष्क्रियता ज्यादा देखी जा रही है। उनका कहना है कि डिजिटल दुनिया ने युवाओं की सामाजिक आदतों को पूरी तरह बदल दिया है।
वहीं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता एसिस इवांस का कहना है कि इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसी ऐप्स ने युवाओं, खासकर महिलाओं, की अपेक्षाओं और जीवनशैली को बदल दिया है। इसकी वजह से स्थायी रिश्ते बनाना पहले के मुकाबले अधिक कठिन होता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो आने वाले दशकों में कई देशों को श्रमबल की कमी, तेजी से बूढ़ी होती आबादी और आर्थिक दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
दुनिया भर की सरकारें पहले से ही गिरती जन्म दर को लेकर चिंतित हैं, लेकिन अब यह बहस और तेज हो गई है कि क्या डिजिटल लाइफस्टाइल और सोशल मीडिया इंसानी रिश्तों और परिवार व्यवस्था को स्थायी रूप से बदल रहे हैं।