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पेंगुइन इंडिया ने सोनिया गांधी की किताब पर विवाद पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘कोई बाहरी दबाव नहीं’

Sonia Gandhi autobiography: सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging' के भारत में प्रकाशन पर पेंगुइन इंडिया का बड़ा बयान, कहा- संपादकीय मतभेद के चलते रुका काम, कोई बाहरी दबाव नहीं। जानें पूरा मामला।
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Sep 01, 2026
Congress leader Sonia Gandhi's book
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की किताब (फोटो- X @RahulGandhi)

Sonia Gandhi autobiography Belonging A Journey of Love: सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर चला रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते सोमवार को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने कहा कि किताब के प्रकाशन का काम रुक गया है। क्योंकि प्रकाशक और लेखिका के प्रतिनिधियों के बीच एक विशेष मुद्दे को लेकर गतिरोध बना हुआ है। प्रशासक ने यह बात साफ तौर पर कहा है कि इस फैसले में किसी भी बाहरी दवाब का हाथ नहीं है।

10 नवंबर को रिलीज होगी दुनिया भर में सोनिया गांधी की किताब

प्रकाशन कंपनी पेंगुइन इंडिया ने बताया कि यह असहमति 'बिनालॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ़ लव' (Belonging: A Journey of Love) की सामान्य एडिटोरियल समीक्षा के दौरान सामने आई, जिसे वह प्रकाशित करने के लिए बहुत उत्सुक थे। भारत में यह स्पीष्टकरण पेंगुइन की तरफ से तब आया जब यह किताब 10 नवंबर को दुनिया भर में रिलीज होगी। भारत में इसके प्रकाशन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया।

सरकार की ओर से बनाया गया दबाव : कांग्रेस

कांग्रेस नेताओं ने सरकार की ओर दबाव बनाने और अभिव्यक्ति की आजादी रोकने का आरोप लगाया। हालांकि, प्रकाशन संस्था ने कहा कि कुछ बदलावों पर सहमति बनी और कुछ पर हमने लेखिका की बात मान ली। लेकिन अंततः एक खास मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। PRHI की प्रवक्ता पल्लवी नारायण ने कहा कि पब्लिशिंग हाउस इस आत्मकथा को लाने के लिए बहुत उत्सुक था और इसे मुश्किल से हासिल की गई उपलब्धि बताया।

नारायण ने PTI को दिए एक खास बयान में कहा कि हमें लगता है कि आने वाली आत्मकथा 'बिनालॉन्गिंग' (Belonging) के बारे में कुछ गलतफहमियों को दूर करना हमारे लिए जरूरी है। यह एक ऐसी किताब है जिसे हम पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया में प्रकाशित करने के लिए बहुत उत्सुक थे, क्योंकि यह मुश्किल से हासिल की गई उपलब्धि थी। पब्लिशर ने कहा कि पांडुलिपि (मैन्युस्क्रिप्ट) अपनी 'सामान्य संपादकीय प्रक्रिया' से गुजरी थी, जिसके दौरान कई मुद्दे उठाए गए और लेखिका के प्रतिनिधियों के साथ उन पर चर्चा की गई। कुछ प्रस्तावित बदलाव स्वीकार किए गए, जबकि अन्य मामलों में पेंगुइन इंडिया ने लेखिका का पक्ष स्वीकार किया।

अनसुलझे मुद्दे ने ही प्रकाशन प्रक्रिया को रोक दिया: PRHI प्रवक्ता

PRHI के अनुसार, आखिरकार उस अनसुलझे मुद्दे ने ही प्रकाशन प्रक्रिया को रोक दिया। इसके बाद लेखिका की टीम ने पब्लिशर को सूचित किया कि वे प्रकाशन के साथ आगे नहीं बढ़ना चाहते। उन्होंने कहा कि हमने उनके फैसले का सम्मान किया। प्रकाशक ने कहा कि चूंकि किताब की सामग्री गोपनीय है और एम्बार्गो के तहत है, इसलिए किसी भी तरह का बाहरी दबाव नहीं था। PRHI ने अपने कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ी बाध्यताओं और लेखक की गोपनीयता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए कहा, 'चूंकि हम एक समझौते से बंधे हैं और लेखिका की गोपनीयता हमारे लिए सबसे ज़रूरी है, इसलिए हम उस वजह का खुलासा नहीं करेंगे जिसकी वजह से गतिरोध पैदा हुआ।'

पब्लिशिंग हाउस ने मैन्युस्क्रिप्ट की जांच-पड़ताल करने के अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि एडिटोरियल मूल्यांकन, सवाल पूछना, तथ्यों की जांच और सुझाव देना एक पब्लिशर के तौर पर उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा था। बता दें कि राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि पेंगुइन इंडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय क्षेत्र पर चीन के कब्जे से जुड़े हिस्सों को हटाने के लिए दबाव डाला गया था।

Updated on:
01 Sept 2026 09:08 am
Published on:
01 Sept 2026 09:06 am