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फागुनी बयार की जगह तपिश, सर्दी से सीधे आ गई गर्मी, सिकुड़ा बसंत

जलवायु परिवर्तन का मौसम पर सीधा असर देखने को मिल रहा है। सर्दी से सीधे गर्मी आ गई है। बसंत का महीना लगातार सिकुड़ता जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर

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Feb 13, 2026
बसंत का मौसम (फोटो-IANS)

एक बरस के मौसम चार…पतझड़, सावन, बसंत, बहार…लिरिक्स वाला गाना हमने खूब सुना है, लेकिन अब देश में मौसम का मिजाज बसंत की बहार जैसा नहीं रहा। इस बार सर्दी के बाद सीधे गर्मी का मौसम आ गया है। पहले फरवरी में दिन में हल्की गर्मी और रात में ठंडक रहती थी, सरसों के खेत पीले फूल कई दिनों तक लहराते दिखते थे, बगीचों में कोयल की कूक और भ्रमरों की गूं-गूं सुनाई देती थी और प्रकृति नई ऊर्जा से भर जाती थी। लेकिन अब अचानक गर्म हवाएं चल रही हैं। बसंत का वो मनमोहक सुकून गायब सा हो गया है। मौसम में इस बदलाव का अहम कारण जलवायु परिवर्तन को माना जा रहा है।

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार फरवरी में तापमान में असामान्य वृद्धि हो रही है, जिससे मौसम सर्दी से सीधे गर्मी की ओर बढ़ रहा है। सामान्य रूप से सर्दी के बाद हल्की ठंडक और फूलों की बहार वाला सुहाना बसंत आता है, लेकिन 2026 में यह संक्रमण काल लगभग छूट गया है। पिछले दो दिनों में दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तरी मैदानी इलाकों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान दोनों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। न्यूनतम तापमान 13-14 डिग्री व अधिकतम तापमान 26 से 29 डिग्री सेल्सियस तक रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 3-5 डिग्री ऊपर है।

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बसंत के दिनों में इस बार यह बदलाव

-मौसम सुहाना रहता था यानी दिन में हल्की गर्मी, रात में ठंडक। लेकिन फरवरी में सर्दी के जाते ही अचानक मई जैसी गर्मी आ गई। अधिकतम तापमान 25 से 30 डिग्री से तक।
-खेतों में सरसों के पीले फूल कई दिन तक लहराते थे, इस बार गर्म हवाओं से सरसों जल्दी पक गई, पीले फूल जल्दी झड़ गए।
-बाग-बगीचों में पतझड़ व नई पत्तियों के खिलने में देरी। अमलतास, गुलाब, चमेली फूलों की महक व कोयल की कूक गायब सी है।

इसलिए सर्दी से सीधे गर्मी आ रही

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है। वैश्विक स्तर पर 2025 सबसे गर्म वर्षों में से एक रहा और विश्व मौसम संगठन ने इसे रिकॉर्ड पर गर्म वर्ष बताया था। भारत में भी फरवरी में तेज वार्मिंग ट्रेंड देखा जा रहा है। उत्तर भारत में सर्दियों की बारिश व बर्फबारी कम हो रही। दक्षिण में सर्दियाें के दिन भी गर्म रहे। बदले मौसम के साथ अब उत्तर भारत में जनवरी में ठंड बनी रहती है, लेकिन फरवरी में तापमान में तेजी से बढ़ता है। यानी इससे सर्दी से गर्मी का सीधा संक्रमण हो रहा है और बसंत सिकुड़ रहा है।

कमजोर बसंत से यह पड़ेगा असर

इससे कृषि, जैव-विविधता और लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। गर्मी की लहर पहले आ सकती है, जिससे हीटवेव का खतरा बढ़ेगा। यह सिर्फ मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और प्रकृति से जुड़े उस सुंदर बसंत के लुप्त होने की चेतावनी है। अगर कार्बन उत्सर्जन कम नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में बसंत सिर्फ यादों में रह सकता है। हालांकि उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ अभी सक्रिय हैं, जिससे 13 फरवरी और 16-17 फरवरी के बीच पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी हो सकती है, लेकिन मैदानों में गर्मी का रुख बरकरार रहेगा।

Published on:
13 Feb 2026 07:02 am
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