पुलिस जांच में पुष्टि हुई है कि कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन दिया गया और उनके भोजन में भी जहर मिलाया गया। शवों को गांव से दूर एक गड्ढे में दफनाया गया था ताकि मामला छिपा रहे।
तेलंगाना के जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में एक बार फिर आवारा कुत्तों की सामूहिक हत्या का मामला सामने आया है। दिसंबर 2024 में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में जीतने के बाद गांव प्रशासन ने वादा किया था कि स्ट्रे डॉग्स की समस्या से छुटकारा दिलाया जाएगा। उसी वादे को पूरा करने के लिए कथित तौर पर सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव ने कुत्तों को जहर देकर मार डाला। शुक्रवार को गांव की सीमा पर एक गड्ढे में करीब 300 कुत्तों के शव दफनाए गए मिले, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
पुलिस जांच में पुष्टि हुई है कि कुत्तों को जहरीला इंजेक्शन दिया गया और उनके भोजन में भी जहर मिलाया गया। शवों को गांव से दूर एक गड्ढे में दफनाया गया था ताकि मामला छिपा रहे। हालांकि, अभी तक जहर के प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है और कोई पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया। पशु अधिकार संगठन Stray Animal Foundation of India (SAFI) की प्रीति मुदावथ ने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि यह क्रूरता की सुनियोजित घटना है।
तेलंगाना पुलिस ने SAFI की शिकायत पर सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 (हत्या या मार डालने की कोशिश) के साथ 3(5), और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत लगाए गए हैं। जगतियाल पुलिस अधिकारी ने कहा, हमने काफी संख्या में कुत्तों के शव बरामद किए हैं। जांच में जहर की पुष्टि हुई है, लेकिन अभी जहर देने वालों की पूरी पहचान नहीं हुई।
SAFI की प्रीति मुदावथ ने जिला प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “शवों का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया, जिससे मौत का सटीक कारण पता नहीं चल सका। यह पशु क्रूरता का स्पष्ट मामला है।” संगठन ने सरकार से मांग की है कि स्ट्रे डॉग्स की समस्या के लिए नसबंदी (ABC प्रोग्राम), टीकाकरण और मानवीय तरीकों को अपनाया जाए, न कि हत्या। पुलिस ने भी स्ट्रे जानवरों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जागरूकता अभियान शुरू किया है।
यह घटना तेलंगाना में जनवरी 2026 से जारी सिलसिले का हिस्सा है, जहां अब तक 900 से ज्यादा आवारा कुत्तों की हत्या की खबरें आई हैं। कामारेड्डी, हनमकोंडा जैसे जिलों में भी सरपंचों पर FIR दर्ज हो चुकी हैं। कई मामलों में पुलिस को शक है कि हत्याएं पेशेवर लोगों से करवाई गईं। पशु प्रेमी इसे 'सुपारी किलिंग' बता रहे हैं।
जांच में पता चला है कि कुत्तों को मारने के पीछे चुनावी वादे थे, लेकिन कानून के सामने यह क्रूरता बर्दाश्त नहीं। पुलिस ने कहा कि मामले की गहराई से जांच हो रही है। यह घटना पशु कल्याण और ग्रामीण प्रशासन की जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।