Stree Deh Se Aage: ‘स्त्री: देह से आगे’ विषय पर आज पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी समाज के सभी वर्ग से संवाद किए। वे स्त्री के अस्तित्व, दिव्यता और महत्ता पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अपने विचार साझा किए।
Stree Deh Se Aage : राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने मंगलवार को चेन्नई के डी.जी. वैष्णव कॉलेज में ‘स्त्री: देह से आगे’ विषय पर विशेष संवाद में कहा कि स्त्री को केवल देह के रूप में देखना उसके वास्तविक स्वरूप और शक्ति को सीमित करना है। शास्त्रों का यही संदेश है कि जहां स्त्री का सम्मान होता है, वहीं देवत्व का वास होता है। कोठारी ने कहा कि हमें जीवन की जटिलताओं और संस्कृति की गहराइयों पर विचार करना चाहिए। समाज में स्त्री के सम्मान और उसकी भूमिका पर निरंतर पुनर्विचार की आवश्यकता है।
कोठारी ने कहा कि ‘स्त्री’ शब्द को डिक्शनरी (शब्दकोश) के अर्थों में नहीं बांधा जा सकता। वैदिक काल में भाषा नहीं थी, संकेतों के जरिए ज्ञान का आदान-प्रदान होता था। स्त्री शब्द का अर्थ भी संकेतों और अनुभवों में निहित है, न कि किसी भाषाई परिभाषा में। उन्होंने कहा कि हमारे ग्रंथों में स्त्री को देवी कहा गया है।
कोठारी ने कहा कि आज सबसे अधिक संकट स्त्री के सम्मान को लेकर है। मीडिया की सुर्खियां उठाकर देखें तो अधिकांश घटनाएं स्त्री के अधिकारों और गरिमा के उल्लंघन से जुड़ी होती हैं। रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सीता और द्रौपदी के बिना ये महाग्रंथ अस्तित्व में ही नहीं आते। इसका अर्थ है कि समाज की कथा-कहानी, संघर्ष और उत्थान-पतन का केंद्र स्त्री रही है। कोठारी ने पत्रकारिता और स्त्री की भूमिका को समानांतर बताते हुए कहा कि जैसे स्त्री संस्कृति की रक्षक है, वैसे ही पत्रकार संस्कृति का प्रहरी है।
संवाद में बड़ी संख्या में महिलाएं, छात्र-छात्राएं और शिक्षाविद् मौजूद थे। प्रश्नोत्तर सत्र में महिलाओं का सवाल था कि आधुनिक दौर में स्त्री अपनी परंपरागत भूमिका और आधुनिक जीवन के बीच संतुलन कैसे बनाए? जवाब में कोठारी ने कहा कि संस्कृति को छोड़कर आधुनिकता अपनाना गलती है। हमें जड़ों से जुड़े रहते हुए नई तकनीक और शिक्षा का लाभ लेना चाहिए। तभी जीवन संतुलित होगा।