डीजीसीए ने वीवीआईपी उड़ानों के लिए सख्त नए नियम लागू किए हैं, जिनमें सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। पायलटों को असुरक्षित स्थिति में उड़ान से इनकार का अधिकार मिला है। क्रू पर दबाव प्रतिबंधित है, साथ ही तकनीकी जांच, ईंधन, मौसम और एयरस्ट्रिप मंजूरी अनिवार्य की गई है।
भारतीय विमानन नियामक DGCA (डीजीसीए) ने वीवीआईपी उड़ानों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये कदम Ajit Pawar के हादसे में निधन के बाद उठाया गया है, जिसने वीआईपी उड़ानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। नए नियमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उड़ानों के संचालन में किसी भी प्रकार का दबाव या समझौता न हो और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
इन दिशा-निर्देशों के तहत सबसे अहम बदलाव यह है कि अब पायलटों को स्पष्ट रूप से यह अधिकार दिया गया है कि यदि उन्हें किसी भी कारण से उड़ान असुरक्षित लगती है, तो वे बिना किसी दबाव के उड़ान भरने से इनकार कर सकते हैं। डीजीसीए ने साफ कहा है कि फ्लाइट क्रू पर किसी भी तरह का दबाव डालना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा, विशेषकर आखिरी समय में वीआईपी आवश्यकताओं के चलते फ्लाइट प्लान में बदलाव के लिए।
सुरक्षा मानकों को और सख्त करते हुए यह भी अनिवार्य किया गया है कि छोटे विमानों में कम से कम दो इंजन और दो क्रू मेंबर होना जरूरी होगा। इसके अलावा, हर उड़ान से पहले विमान की पूरी तकनीकी जांच और प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) अनिवार्य कर दिया गया है। यदि किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी पाई जाती है, तो उसे अगली उड़ान से पहले ठीक करना अनिवार्य होगा। इन नए दिशा-निर्देशों के जरिए डीजीसीए ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वीआईपी उड़ानों में भी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और पायलटों तथा क्रू को स्वतंत्र और सुरक्षित निर्णय लेने का पूरा अधिकार दिया जाएगा।
नए नियमों में ईंधन की गुणवत्ता और उसकी पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। साथ ही मौसम की स्थिति, नेविगेशन उपकरणों की कार्यक्षमता और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच भी अनिवार्य होगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उड़ान पूरी तरह सुरक्षित परिस्थितियों में ही संचालित हो। इसके अतिरिक्त, जिस एयरस्ट्रिप या हेलिपैड पर लैंडिंग होनी है, उसकी मंजूरी कम से कम 24 घंटे पहले लेना आवश्यक होगा। जिला प्रशासन से अनुमति की पुष्टि भी जरूरी होगी, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक या सुरक्षा संबंधी समस्या न उत्पन्न हो।