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5 करोड़ के नोटिस पर सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से की शिकायत, बोले- दबाव बना रहे IPS कुंदन कृष्णन

बक्सर से RJD सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है। यह पत्र IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए मानहानि के एक कथित नोटिस के संबंध में है, जिसमें 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह नोटिस उनके संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने की कोशिश हो सकती है और उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है।
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Oct 19, 2026
Sudhakar Singh
RJD सांसद सुधाकर सिंह(Photo-IANS)

Sudhakar Singh vs IPS Kundan Krishnan: बक्सर से RJD के लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखा है। यह पत्र वरिष्ठ IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन द्वारा भेजे गए मानहानि नोटिस के संबंध में है, जिसमें 5 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई है। सांसद का आरोप है कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा इस तरह का कानूनी नोटिस भेजना, उनके संसदीय कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा डालने और एक चुने हुए जनप्रतिनिधि पर अनुचित दबाव बनाने की कोशिश है। सुधाकर सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष से इस मामले में हस्तक्षेप करने और जांच शुरू कराने का आग्रह किया है।

क्या है पूरा विवाद

सुधाकर सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि उन्होंने भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी की संदिग्ध मौत और कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में जनहित में सवाल उठाए थे। इस घटना के संबंध में इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, मृतक की मां की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है और राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के लिए एक समिति का गठन किया है।

सुधाकर सिंह ने कहा कि घटना के समय IPS अधिकारी कुंदन कृष्णन बिहार स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के महानिदेशक (DG) के पद पर तैनात थे, इसलिए एक निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर उन्होंने मांग की कि जांच केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि उस समय की कमांड संरचना और शीर्ष नेतृत्व की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके जवाब में, उक्त अधिकारी ने अपने निजी वकील के माध्यम से एक नोटिस भेजा, जिसमें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई और मानहानि का मुकदमा करके 5 करोड़ रुपये के हर्जाने की चेतावनी दी गई।

अधिकारी को अदालत जाने से पहले सरकार से अनुमति लेना जरूरी - सुधाकर सिंह

संवैधानिक प्रावधानों और सेवा नियमों का हवाला देते हुए सुधाकर सिंह ने बताया कि ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 के नियम 17 के तहत किसी भी अधिकारी के लिए अपने आधिकारिक कर्तव्यों से जुड़े मामलों में अदालत जाने से पहले सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। इसलिए, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या संबंधित अधिकारी ने केंद्र सरकार या बिहार सरकार से आवश्यक अनुमति ली थी।

इसके अलावा, सुधाकर सिंह ने नोटिस जारी करने वाली निजी लॉ फर्म की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व केवल एडवोकेट जनरल या सरकार द्वारा अधिकृत कानूनी अधिकारी ही कर सकते हैं। कोई IPS अधिकारी खुद को पूरी बिहार सरकार के बराबर नहीं मान सकता, और न ही किसी अधिकारी का निजी वकील राज्य सरकार का अधिकृत प्रतिनिधि हो सकता है।

लोकतांत्रिक जवाबदेही बनाए रखने की अपील

लोकसभा अध्यक्ष को लिखे एक पत्र में सुधाकर सिंह ने कहा है कि यदि वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी अपने आधिकारिक कार्यों पर सवाल उठाने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों को मुकदमों की धमकी देकर डराने लगें, तो यह लोकतांत्रिक निगरानी और संसद की गरिमा पर हमला होगा।

संविधान के अनुच्छेद 105 का हवाला देते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि सदस्यों के संसदीय आचरण को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास की जांच होनी चाहिए। सांसद ने मांग की है कि लोकसभा सचिवालय बिहार सरकार से स्पष्टीकरण मांगे, किसी भी न्यायिक जांच के निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाए और निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

Updated on:
19 Oct 2026 01:02 pm
Published on:
19 Oct 2026 01:01 pm