
Satluj Film: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मशहूर एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर अहम घोषणा की है। बादल ने पार्टी के सभी नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे पंजाब के हर शहर, कस्बे और गांव में आम जनता और युवाओं के लिए यह फिल्म दिखाएं। सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि मौजूदा पीढ़ी के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सिख समुदाय पर क्या-क्या अत्याचार हुए थे।
शिरोमणि अकाली दल पूरे पंजाब में दिलजीत दोसांझ की शानदार फिल्म Satluj की स्क्रीनिंग करेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आज के युवा और हमारी आने वाली पीढ़ियां उस भयानक त्रासदी और दमन के बारे में जानें, जो उस समय की बेरहम कांग्रेस सरकारों ने भाई जसवंत सिंह खालरा और हजारों अन्य बेगुनाह सिख युवाओं पर ढाया था, जिन्हें फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया था।
यह फिल्म उस दौर में पंजाब के दर्द को दिखाती है। सचखंड श्री हरमंदिर साहिब और श्री अकाल तख्त साहिब पर हुए भयानक और कभी न माफ किए जा सकने वाले हमले के बाद सिख युवा गहरे धार्मिक तनाव से गुजर रहे थे।
बाद में उसी साल अक्टूबर-नवंबर में, नई दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों में अनगिनत बेगुनाह सिखों का अभूतपूर्व नरसंहार किया गया। अब, पंजाबियों, खासकर सिखों को उस दौर को याद करने और उसे इतिहास के रूप में दर्ज करने से रोका जा रहा है।
शिरोमणि अकाली दल इस अन्याय का कभी भी मूक गवाह नहीं बनेगा। इसीलिए, मैं अकाली दल के हर कार्यकर्ता, हर पदाधिकारी और हर नेता को निर्देश देता हूं कि वे पंजाब के हर गांव, कस्बे और शहर के कोने-कोने में इस फिल्म (Satluj) को दिखाएं।
OTT प्लेटफॉर्म Zee5 से फिल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, हमें तभी समझ जाना चाहिए था कि कुछ गड़बड़ है, जब दिलजीत दोसांझ ने कहा था कि फिल्म OTT प्लेटफॉर्म पर 2-3 दिन के लिए उपलब्ध रहेगी और फिर हटा दी जाएगी। अगर सरकार सच में फिल्म को हटाना चाहती, तो वह इसे स्ट्रीम ही क्यों होने देती? ऐसा लगता है कि जब उन्होंने जरूरी पैसे कमा लिए, तो उन्होंने (फिल्म बनाने वालों ने) फिल्म हटा दी। OTT प्लेटफ़ॉर्म पर सरकार का कोई कंट्रोल नहीं है। दिलजीत दोसांझ सिर्फ़ पैसे के बारे में सोचते हैं। अगर दिलजीत दोसांझ को अपने परिवार की महिलाओं, जैसे अपनी मां या बहन, के लिए जरा भी सम्मान होता, तो वे 'चमकीला' फ़िल्म में काम नहीं करते।