सुखोई क्रैश (Sukhoi crash) में अपनी जान गवाने वाले नागपुर के फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा रहे थे। उनके निधन के बाद उनके पिता ने यह जानकाशी शेयर की है।
असम में हुए सुखोई क्रैश (Sukhoi crash) की घटना से पूरे देश में दुख का माहौल है। इस घटना में दो जवान पायलटों की मौत हो गई हैं जिसमें से एक फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर थे। दुरागकर एक बहुत ही प्रशिक्षित पायलट थे और उन्होंने पिछले साल भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) में भी हिस्सा लिया था। बता दें कि गुरुवार शाम भारतीय वायु सेना के इस सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट (Sukhoi-30 MKI fighter jet) ने रूटीन मिशन के लिए जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी। लेकिन कुछ देर बाद यह रडार से गायब हो गया था। बाद में खोज अभियान के दौरान असम के करबी आंगलोंग इलाके में इसका मलबा मिला था। इस घटना में पुरवेश के साथ-साथ स्क्वाड्रन लीडर अनुज का भी निधन हो गया।
फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर उस टीम का हिस्सा थे जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत की बड़ी जवाबी कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर में योगदान दिया था। यह ऑपरेशन 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इस दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कई आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस अभियान में सौ से अधिक आतंकियों को खत्म किया गया था। पुरवेश के पिता रवींद्र दुरागकर ने बताया कि उनके परिवार को काफी समय बाद इस बात का पता चला था कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लिया था।
पुरवेश के पिता ने बताया कि उन्हें ऑपरेशन खत्म होने के करीब 15 दिन बाद इस बात का पता चला था। इस ऑपरेशन के दौरान पुरवेश के पास फोन नहीं था और हमारी उससे कई दिनों तक कोई बात नहीं हो पाई थी। रवींद्र दुरागकर ने कहा कि उनके बेटे को भारतीय वायु सेना में सेवा करने पर बेहद गर्व था। वह कभी कभी फाइटर जेट उड़ाने के अपने अनुभव परिवार के साथ साझा करते थे। पिता के अनुसार पुरवेश अपने साथियों का बहुत अधिक सम्मान करते थे। पिता ने बताया कि हादसे से एक दिन पहले ही उनकी बेटे से फोन पर बात हुई थी और वह दस दिन पहले ही परिवार से मिलने घर आए थे। पुरवेश नागपुर के रहने वाले थे और उनके परिवार के माता-पिता के अलावा एक बहन भी है।