
Aviation Fare Row: हवाई यात्रियों से त्योहारों, छुट्टियों और आपातकालीन परिस्थितियों में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष कोर्ट ने लोगों को एयरलाइन कंपनियों की मनमानी से बचाने के लिए सोमवार को केंद्र सरकार को 7 दिनों में नए हवाई किराया नियमों का प्रकाशन करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही कोर्ट ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एयरलाइंस कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करती हैं, तो उनके विमान तुरंत ग्राउंडेड (उड़ानें ठप) कर दिए जाएं।
कोर्ट में सरकार का पक्ष एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने रखा। उन्होंने बताया कि नियम बनाने की प्रक्रिया 3 सप्ताह में पूरी हो जाएगी। उन्होंने कोर्ट में ड्राफ्ट नियम दिखाए। इसके बाद बेंच ने केंद्र सरकार को सीलबंद लिफाफे में रखे गए ड्राफ्ट नियमों को सार्वजनिक करने और 7 दिनों के भीतर प्रकाशित करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय की गई।
शीर्ष कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने स्पष्ट कहा कि यात्रियों के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियम न मानने वाली एयरलाइंस के प्लेन सीधे खड़े कर दिए जाएंगे।
यह कानूनी लड़ाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की एक जनहित याचिका (PIL) के बाद शुरू हुई। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर देश में घरेलू एयरलाइंस द्वारा आम नागरिकों के आर्थिक शोषण का खुलासा किया था।
एयरलाइंस कंपनियां दिवाली, छठ, ईद और गर्मियों की छुट्टियों जैसे पीक सीजन में टिकटों की कीमतें अचानक 3 से 4 गुना तक बढ़ाकर लोगों से वसूली करती हैं। कोर्ट ने मई में पिछली सुनवाई के दौरान इस पर संज्ञान लिया था कि एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस कंपनियां दोगुने से ज्यादा किराया लोगों से वसूल रही थीं।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि निजी विमानन कंपनियों ने इकोनॉमी क्लास के यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम से घटाकर सीधे 15 किलोग्राम कर दी है। पहले जो सुविधाएं मूल टिकट का हिस्सा होती थीं, अब उन्हें ‘सीट चयन शुल्क’ (Seat Selection Fee) और ‘अतिरिक्त बैगेज शुल्क’ जैसे छिपे हुए शुल्क के माध्यम से कमाई का एक बड़ा जरिया बना दिया गया है।