
स्मृति ईरानी (फाइल फोटो - आईएएनएस)
Smriti Irani Appointed BJP National General Secretary: भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी दी है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में उनकी वापसी को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि स्मृति ईरानी की राजनीतिक पहचान उत्तर प्रदेश और खासकर अमेठी से ही जुड़ी रही है।
स्मृति ईरानी 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हराकर बीजेपी की सबसे चर्चित नेताओं में शामिल हुई थीं। हालांकि, 2024 में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अब संगठन में राष्ट्रीय महामंत्री के तौर पर उनकी वापसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका को फिर चर्चा में ला दिया है।
स्मृति ईरानी कभी नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख चेहरों में शामिल थीं। वह केंद्र में महिला एवं बाल विकास समेत अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद वह बीजेपी की केंद्रीय संगठनात्मक टीम में पहले की तरह सक्रिय भूमिका में नहीं थीं। अब नितिन नवीन की नई टीम में राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने के बाद वह फिर बीजेपी के शीर्ष संगठनात्मक ढांचे का हिस्सा बन गई हैं।
राष्ट्रीय महामंत्री बनने पर स्मृति ईरानी ने कहा कि यह उनके लिए बेहद भावुक और विनम्र करने वाला अनुभव है। उन्होंने खुद पर भरोसा जताने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन का आभार जताया। साथ ही कहा कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने के लिए काम करेंगी।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। यह चुनाव बीजेपी के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका लगा था।
2024 में विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से 43 सीटें जीती थीं। वहीं NDA को 36 सीटें मिली थीं, जिनमें बीजेपी के खाते में 33 सीटें आई थीं। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी संगठन को मजबूत करने और अपने राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
स्मृति ईरानी का उत्तर प्रदेश से सबसे बड़ा राजनीतिक जुड़ाव अमेठी से रहा है। उन्होंने पहली बार 2014 में अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में वह राहुल गांधी से हार गई थीं लेकिन इसके बाद उन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता बनाए रखी।
2019 में उनकी लगातार सक्रियता का फायदा मिला। उन्होंने राहुल गांधी को 55,120 वोटों से हराया। ईरानी को 4,68,514 वोट मिले, जबकि राहुल गांधी को 4,13,394 वोट मिले थे। इस जीत के बाद बीजेपी में उनकी राजनीतिक हैसियत तेजी से बढ़ी और उन्हें पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिना जाने लगा। हालांकि, 2024 में अमेठी का चुनावी समीकरण बदल गया। कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा ने स्मृति ईरानी को 1.67 लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया।
स्मृति ईरानी की सबसे बड़ी ताकत उनकी हाई-विजिबिलिटी और आक्रामक चुनावी राजनीति है। संगठन में पर्दे के पीछे काम करने वाले नेताओं से अलग उनकी पहचान एक ऐसे नेता की है जो सीधे चुनावी मैदान में पार्टी का संदेश रखने में सक्षम हैं।
उनके साथ नई टीम में सुनील बंसल, विनोद तावड़े, बिप्लब कुमार देब और सतीश पूनिया जैसे अनुभवी नेताओं को भी अहम जिम्मेदारियां मिली हैं। सुनील बंसल को उत्तर प्रदेश में बीजेपी के मजबूत बूथ संगठन और चुनावी मशीनरी को खड़ा करने का श्रेय दिया जाता है।
ऐसे में स्मृति ईरानी की भूमिका सिर्फ संगठनात्मक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रह सकती। वह राज्य इकाई के साथ समन्वय, चुनावी रणनीति, उम्मीदवारों से जुड़े फैसलों और जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
स्मृति ईरानी की वापसी को बीजेपी के महिला वोटरों पर फोकस से भी जोड़कर देखा जा सकता है। पिछले एक दशक में महिला मतदाता बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण चुनावी आधार बनी हैं। स्मृति ईरानी खुद महिला एवं बाल विकास मंत्री रह चुकी हैं और बीजेपी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रही हैं। ऐसे में उनके पास संगठन और सरकार, दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव है।
कुल मिलाकर, नितिन नवीन की नई टीम में स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महामंत्री बनाना सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं माना जा रहा। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने उन्हें फिर से अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में लाने का संकेत दिया है। हालांकि, उनकी नई भूमिका का वास्तविक असर चुनाव में कितना दिखाई देगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।
Updated on:
17 Aug 2026 09:34 pm
Published on:
17 Aug 2026 09:34 pm
