
Voter List 2026: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) से सवाल किया है कि जो मतदाता पहले से ही 2026 की मतदाता सूची में शामिल हैं, उन्हें 'फॉर्म 6' (जो पहली बार वोट देने वालों के लिए है) क्यों भरना पड़ रहा है? यह सवाल तब उठा है जब लगभग 43 लाख मतदाताओं को 'स्थान बदलने' या 'अनुपस्थित' होने के कारण ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है।
चुनाव आयोग (ECI) का कहना है कि वह देर से जमा किए गए फॉर्मों को स्वीकार करने पर विचार करेगा और जरूरत पड़ने पर 30 अक्टूबर की समय-सीमा को भी बढ़ा सकता है। आयोग को इस पर दो सप्ताह के भीतर जवाब देना है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, जिन मतदाताओं के नाम पहले से सूची में दर्ज हैं, उनसे नए मतदाता की तरह आवेदन में फार्म 6 भरने की अपेक्षा क्यों की जा रही है। फॉर्म 6 की प्रक्रिया पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए तय है, ऐसे में पहले से सूची में शामिल लोगों पर यही शर्त लागू करना सवालों के घेरे में आ गया है। अदालत ने इसी विसंगति पर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि, वह देर से जमा किए गए फॉर्मों को स्वीकार करने पर विचार करेगा। यह उन मतदाताओं के लिए राहत की खबर हो सकती है, जो किसी कारणवश तय समय पर अपना फॉर्म जमा नहीं कर पाए। वहीं आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर 30 अक्टूबर की समय-सीमा को बढ़ाया जा सकता है। समय सीमा बढ़ने पर बड़ी संख्या में छूटे हुए मतदाताओं को अपना नाम सूची में दर्ज कराने या बनाए रखने का अतिरिक्त मौका मिल सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को इस पूरे मामले में दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब सबकी नजरें आयोग के जवाब पर टिकी हैं कि वह फॉर्म 6 की अनिवार्यता को लेकर क्या जवाब पेश करता है और 43 लाख मतदाताओं के मताधिकार की रक्षा के लिए क्या कदम उठाता है।