
Supreme Court Law Admission: सुप्रीम कोर्ट में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले की अधिकतम उम्र को लेकर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से इस ऊपरी उम्र सीमा पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत के सवालों ने इस बहस को फिर सामने ला दिया है कि कानून की पढ़ाई के लिए उम्र सीमा तय करने का आधार कितना उचित है।
पांच वर्षीय कानून पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए तय अधिकतम उम्र सीमा का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। BCI को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित अधिकारियों से निर्देश लेकर बताए कि क्या वह पांच वर्षीय लॉ कोर्स में प्रवेश के लिए निर्धारित ऊपरी आयु सीमा को हटाने पर सहमत है।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से BCI की नियम बनाने की शक्ति पर ही सवाल खड़ा किया गया। दलील दी गई कि यदि कानून के तहत किसी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित करने का अधिकार है, तो क्या उसी आधार पर प्रवेश के लिए अधिकतम उम्र भी तय की जा सकती है? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि उम्र की सीमा सीधे उन अभ्यर्थियों के अवसर को प्रभावित करती है, जिन्होंने किसी अन्य वजह से अपनी पढ़ाई बाद में शुरू करने का फैसला किया है।
पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान पांच वर्षीय लॉ कोर्स की आवासीय प्रकृति को भी उम्र सीमा का आधार मानने पर सवाल उठाया। उनका संकेत था कि किसी पाठ्यक्रम का रेजिडेंशियल स्वरूप अपने आप में यह तय करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता कि कौन-सी उम्र तक छात्र उसमें प्रवेश ले सकता है।
BCI ने अदालत से एक सप्ताह का समय मांगा है, ताकि वह इस विषय पर आवश्यक निर्देश प्राप्त कर सके। सुप्रीम कोर्ट ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले को दो सप्ताह बाद फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
यह विवाद नया नहीं है। BCI के Legal Education Rules, 2008 में पहले पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कार्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्र संबंधी प्रावधान किया गया था। वर्ष 2016 में BCI ने संबंधित प्रावधान को फिर से लागू करने की कोशिश की थी। इसके बाद उम्र सीमा को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं। मार्च 2017 में शीर्ष अदालत ने BCI की उस अधिसूचना पर रोक भी लगाई थी।
बाद में 2019 में भी सुप्रीम कोर्ट ने BCI को विभिन्न पक्षों से विचार-विमर्श के बाद लॉ पाठ्यक्रमों में ऊपरी आयु सीमा पर पुनर्विचार करने को कहा था।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से BCI की नियम बनाने की शक्ति को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया। अब ताजा सुनवाई ने इस पुराने विवाद को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल BCI का अंतिम रुख सामने आना बाकी है, और अगली सुनवाई में अदालत के सामने उसका जवाब महत्वपूर्ण रहेगा।