Supreme Court Decision on Street Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से स्ट्रीट डॉग हटाने संबंधी अपना पुराना आदेश बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि Article 21 के तहत नागरिकों को भयमुक्त सार्वजनिक जीवन का अधिकार है और सरकारों को लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
Supreme Court Decision on Street Dogs: देशभर में लगातार सामने आ रही डॉग बाइट घटनाओं ने आम लोगों की चिंता को गंभीर बना दिया है। अस्पताल, स्कूल, रेलवे स्टेशन और बस अड्डों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर स्ट्रीट डॉग की मौजूदगी को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने नवंबर 2025 के आदेश में बदलाव करने से इनकार करते हुए साफ कहा कि वह जमीनी सच्चाइयों से आंखें बंद नहीं की जा सकती। अदालत ने सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि देश में स्ट्रीट डॉग हमलों की घटनाएं लगातार गंभीर होती जा रही हैं। अदालत ने विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कई मामलों में छोटे बच्चों को कुत्तों ने बुरी तरह घायल किया, बुजुर्गों पर हमला हुआ और विदेशी पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वर्तमान स्थिति में जमीन पर सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट जैसा माहौल दिखाई दे रहा है, जहां कमजोर वर्ग खुद को बचाने के लिए अकेला छोड़ दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि राज्य केवल मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आर्टिकल 21 की व्यापक व्याख्या करते हुए कहा कि जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है। इसमें हर नागरिक का यह अधिकार भी शामिल है कि वह बिना डर के सार्वजनिक स्थानों पर आ जा सके। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को हर समय डॉग बाइट या शारीरिक हमले की आशंका में जीने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, यदि सार्वजनिक स्थानों पर जीवन के लिए खतरा बना रहता है तो यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि कानून में पहले से मौजूद व्यवस्थाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना सरकारों की जिम्मेदारी है।
अदालत ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से स्ट्रीट डॉग को हटाकर शेल्टर में भेजा जाना चाहिए। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकारों और नगर निकायों पर दबाव बढ़ेगा कि वे प्रभावी कार्रवाई करें। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल पकड़ने की कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि वैक्सीनेशन, नसबंदी और बेहतर शेल्टर व्यवस्था भी जरूरी होगी। हालांकि अदालत ने साफ संकेत दिया कि मानव जीवन और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासनिक ढिलाई अब स्वीकार नहीं की जाएगी।