
Delhi Pollution News: सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों के दौरान पटाखों को नियंत्रित करने के अपने निर्देशों को लागू करने में विफल रहने पर दिल्ली सरकार और 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) को फटकार लगाई है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि निर्देशों का पालन न होने से ऐसा लगता है कि कोर्ट के आदेश केवल किताबी बनकर रह गए हैं। बार-बार नियमों का उल्लंघन करना एक तरह से मजाक उड़ाने जैसा लगता है।
सर्दियों के दौरान प्रदूषण से निपटने के लिए अधिकारियों ने कोर्ट के सामने उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन उपायों में 608 एंटी-स्मॉग गन, EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हरियाली बढ़ाने के उपाय और बेहतर निगरानी शामिल हैं। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने एक एक्शन प्लान तैयार किया है और वह प्रदूषण सीजन के लिए पूरी तरह तैयार है।
इसके बाद कोर्ट ने एमिकस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि CAQM की 29 इकाइयों में से केवल 9 ही काम कर रही हैं। कोर्ट ने अनुपालन और पड़ने वाले प्रभाव की रिपोर्ट न होने पर भी सवाल किया।
अपने दिए आदेश की पालना नहीं होंने पर कोर्ट ने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि आपने किया क्या है एक साल में? कोर्ट ने पूछा कि क्या पिछले साल दिए गए आदेशों की पालने के लिए बनाई गई प्रवर्तन टीमों ने वास्तव में चिन्हित इलाकों का दौरा किया था। कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या इन इलाकों का AQI बढ़ा है या कम हुआ है, इसकी जांच भी की है या नहीं। अनुपालना रिपोर्ट और डेटा नहीं देने के कारण कोर्ट ने कहा कि उनके दिए आदेश मजाक बनकर रह जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा अधिकारियों के लिए कोई आपसी विवाद का विषय नहीं है, बल्कि इसका संबंध हर जीवित प्राणी से है। कोर्ट ने यह भी कहा कि वह त्योहारों से जुड़ी लोगों की भावनाओं को समझता है और उसका मकसद धार्मिक पहलुओं में दखल देना नहीं है, लेकिन उसने इस बात पर जोर दिया कि बिना किसी को नुकसान पहुंचाए त्योहार मनाने का कोई व्यावहारिक तरीका खोजना जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि वह पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं। उसका पक्ष एक संतुलन बनाना है। इसलिए कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि वे दीपावली के त्योहार के दौरान दो दिन विशेष ध्यान दें, जब पटाखे जलाने की अनुमति है। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि अधिकारी वास्तव में मौके पर जाकर स्थिति की निगरानी करें।