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दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, जांच कमेटी को एक महीने में देनी होगी पहली रिपोर्ट

Delhi Protest: दिल्ली प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी को एक महीने में पहली फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
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Updated: 5 Nov 2026, 2:34 PM IST
Delhi Police Injury news
दिल्ली प्रदर्शन में पुलिस कार्रवाई। (फोटो- IANS)

दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को लेकर गठित हाई पावर कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी पहली फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा है कि वह शिकायतों का अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकता। कमेटी को अब तक मिले दस्तावेजों, वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ानी होगी।

सीजेआई की बेंच ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि कमेटी को केवल उन लोगों की शिकायतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, जो खुद उसके सामने पेश हुए हैं। वकीलों और सामाजिक रूप से जागरूक लोगों की ओर से पीड़ितों के मामले में भेजी गई याचिकाओं और सबूतों पर भी विचार करना होगा।

समय सीमा में काम पूरा करने पर जोर

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमेटी को समय सीमा में काम पूरा करने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि कमेटी के पास अब तक जो भी सामग्री पहुंची है, उसकी जांच शुरू की जाए।

संबंधित अधिकारियों से इन आरोपों पर जवाब मांगा जाए और अदालत की ओर से प्राथमिकता के तौर पर तय किए गए दो मुद्दों पर अपनी शुरुआती रिपोर्ट तैयार की जाए।

पीड़ित खुद नहीं पहुंचे तो भी होगी जांच

सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि जांच के लिए यह जरूरी नहीं है कि हर पीड़ित खुद कमेटी के पास शिकायत लेकर पहुंचे। अगर किसी वकील या आम नागरिक ने पीड़ितों की ओर से कोई याचिका, वीडियो या दूसरा सबूत कमेटी को दिया है, तो उसे भी जांच में शामिल किया जाना चाहिए।

31 अक्टूबर की रिपोर्ट पर कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की ओर से 31 अक्टूबर को सौंपी गई रिपोर्ट का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट केवल अब तक हुई जांच की स्थिति बताती है। इसमें पुलिस ज्यादती के आरोपों पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि जांच में सामने आने वाले जरूरी निष्कर्ष आमतौर पर संबंधित पक्षों के साथ साझा किए जाने चाहिए। हालांकि, अगर किसी खास परिस्थिति में जानकारी गोपनीय रखना जरूरी हो, तो इसमें छूट दी जा सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है।

Updated on:
5 Nov 2026, 2:34 PM IST
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