
Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार की समीक्षा याचिका ठुकरा दी है। कंपनी एक्ट के कुछ अपराधों में निजी व्यक्ति की शिकायत पर संज्ञान लेने पर रोक के फैसले पर केंद्र ने दोबारा विचार करने की मांग की थी।
इस पर अदालत ने साफ कह दिया कि पुराने फैसले में कोई बदलाव की जरूरत नहीं। यह फैसला उन मामलों से जुड़ा है जहां गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों की जांच होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र को रास्ता भी दिखाया। सेक्शन 212(6) के दूसरे प्रोविजन का इस्तेमाल करके कोई भी अधिकारी शिकायत दर्ज करवा सकता है। केंद्र सामान्य या खास आदेश से किसी भी अधिकारी को यह अधिकार दे सकता है।
केंद्र सरकार चाहती थी कि पुराना फैसले को दोबारा देखा जाए। लेकिन कोर्ट ने साफ इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फैसला सही है और उसमें कोई खामी नहीं।
साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र चाहे तो एसएफआईओ के अलावा अन्य जांच एजेंसियों के मामलों में भी आरओसी अधिकारी को अधिकृत कर सकता है।
सुनवाई के दौरान जजों ने एसएफआईओ जांच से अलग मामलों पर भी बात की। निजी शिकायतों पर रोक लगाने वाले फैसले के बावजूद सरकार के पास विकल्प मौजूद हैं। कोई भी अधिकृत अधिकारी शिकायत दाखिल कर सकता है। इससे जांच और मुकदमे की प्रक्रिया रुकने का खतरा कम हो जाएगा।
कंपनी एक्ट के कुछ अपराधों में सिर्फ सरकारी एजेंसियां या अधिकृत अधिकारी ही शिकायत कर सकते हैं। निजी व्यक्ति सीधे अदालत नहीं जा सकता। इस नियम को सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सही ठहराया था।
केंद्र की समीक्षा याचिका में इसी फैसले को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने दोहराया कि यह नियम कानून के मुताबिक है। लेकिन साथ में केंद्र को याद दिलाया कि वह किसी आरओसी अधिकारी या अन्य अधिकारी को लिखित आदेश से शिकायत दायर करने का अधिकार दे सकता है। इससे निजी शिकायतों की जगह सरकारी मशीनरी काम करेगी।