
दिल्ली-एनसीआर में हर साल दिवाली के बाद खराब होने वाली हवा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम बात कही है। अदालत ने कहा कि सिर्फ आदेश जारी करने और पुलिस तैनात करने से पटाखों से होने वाले प्रदूषण पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
इसके लिए आम लोगों को भी आगे आना होगा। कोर्ट ने कहा कि पटाखे रहित दिवाली मनाना सरकार या अदालत की पहल तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जनता का आंदोलन बनाना होगा।
मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों से कहा कि दिवाली के दौरान प्रदूषण रोकने के लिए स्थानीय पार्षदों की मदद ली जाए। पार्षद अपने-अपने इलाकों में लोगों से अपील करें कि वे ऐसे पटाखे न जलाएं, जिनसे हवा जहरीली होती है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अदालत जितने ज्यादा आदेश जारी करती है, कई बार उनका उल्लंघन भी उतना ही बढ़ जाता है। इसलिए प्रदूषण जैसी समस्या का समाधान केवल कानूनी आदेशों से नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि स्थानीय पार्षदों को इस अभियान से जोड़ना जरूरी है। उन्हें लोगों के बीच जाकर समझाना चाहिए कि दिवाली का त्योहार मनाते समय पर्यावरण और दूसरों की सेहत का भी ध्यान रखें।
सुनवाई में अदालत की मदद कर रहीं वरिष्ठ वकील और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने पटाखों की बिक्री और नियमों के पालन को लेकर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखों की अनुमति का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ दुकानदार दुकानों के बाहर ग्रीन पटाखों के हरे डिब्बे दिखाते हैं, लेकिन अंदर चोरी-छिपे प्रतिबंधित सामान्य पटाखे बेचते हैं।
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि पुलिस के जरिए हर घर पर नजर रखना व्यावहारिक नहीं है। राज्य सरकार हर घर के बाहर एक पुलिसकर्मी तैनात नहीं कर सकती। ऐसे में लोगों की भागीदारी के बिना नियमों को लागू करना मुश्किल है।