लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल अदालत को डराने, दबाव बनाने या न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति का पद कितना भी ऊंचा क्यों न हो, उसे न्याय व्यवस्था को प्रभावित करने या उसकी निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।