पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारे का माहौल गर्म है। इस चुनावी माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को करारी फटकार लगाई है। आइए जानते हैं पूरा मामला...
West Bengal Assembly Elections: पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए 2 चरणों में वोटिंग होगी। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों के लिए मतदान होगा। वहीं, दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा। पश्चिम बंगाल के इस चुनावी माहौल के बीच सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि विकास के मुद्दे पर राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने विकास कार्यों में हो रही देरी के लिए भी सरकार से नाराजगी जताई और सख्त टिप्पणी की है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार की एक याचिका को खारिज कर दिया और कड़ी फटकार लगाई है। इस याचिका में कोलकाता मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में देरी और उसे कुछ समय के लिए रोकने की अनुमति मांगी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी सरकार की इस पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ अधिकारियों का अड़ियल रवैया दिखाता है, जिसमें वे कोलकाता में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में देरी करना और उसे रोकना चाहते हैं। कोर्ट ने आगे कहा- हमें यकीन है कि प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से पूरा होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के एक कॉरिडोर के निर्माण में बाधा डालने के लिए उसकी कड़ी आलोचना की है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा- विकास के ऐसे मुद्दे, जो आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाते हैं, उनका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि यह आपके संवैधानिक कर्तव्यों की अनदेखी है। आप अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर चीज का राजनीतिकरण जरूरी नहीं है। यह शुद्ध रूप से विकास का मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि आम जनता के हित में चल रहे प्रोजेक्ट में बाधाएं डालने की सराहना न करे।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आगे कहा कि हाईकोर्ट राज्य सरकार के प्रति बहुत उदार रहा है। यह ऐसा मामला था जहां मुख्य सचिव, DGP और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए थी। कोर्ट की टिप्पणी पर राज्य के वकील ने आगामी चुनावों में लागू आदर्श आचार संहिता और चल रही बोर्ड परीक्षाओं का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 23 दिसंबर 2025 के आदेश का जिक्र करते हुए पीठ ने पूछा कि उसके बाद से किसने सरकार को निर्देशों का पालन करने से रोका है? जस्टिस बागची ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग चल रहे विकास प्रोजेक्ट पर कोई आपत्ति नहीं उठा सकता, खासकर जब हाईकोर्ट इसकी निगरानी कर रहा हो। कोर्ट ने राज्य को स्पष्ट निर्देश दिए कि वह प्रोजेक्ट में कोई रुकावट न डाले और इसे सुचारू रूप से आगे बढ़ने दे।