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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अवशेष जापान से भारत लाने की मांग पर SC में सुनवाई, याचिकाकर्ता के ‘बेटी’ होने के दावे पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेष जापान से भारत लाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान एक इंटरवेनर ने याचिकाकर्ता के नेताजी की बेटी होने के दावे पर सवाल उठाया।
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Sep 28, 2026
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (File Photo)

Netaji Subhash Chandra Bose Mortal Remains:सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पार्थिव अवशेषों को जापान से भारत लाने से संबंधित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट में दिलचस्प घटनाक्रम देखने को मिला, जब एक इंटरवेनर (हस्तक्षेपकर्ता) ने व्यक्तिगत रूप से याचिकाकर्ता के उस दावे पर संदेह जताया कि वह स्वर्गीय नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पुत्री हैं।

याचिका में नेताजी के अवशेष, जो जापान के टोक्यो स्थित रेंकोजी मंदिर में संरक्षित बताए जाते हैं, को भारत लाने की मांग की गई है, ताकि अंतिम संस्कार गरिमा के साथ किया जा सके। सुनवाई के दौरान इंटरवेनर ने याचिकाकर्ता की हैसियत और उनके नेताजी की बेटी होने के दावे पर सवाल खड़े किए।

वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. ए.एम. सिंघवी ने ऐसे हस्तक्षेपों को अस्वीकार करने की मांग की। उन्होंने कोर्ट से कहा कि वह इंटरवेनर के लोकस (locus standi) यानी कानूनी हैसियत की जांच कर सकती है और अनावश्यक हस्तक्षेपों की अनुमति नहीं देनी चाहिए। सिंघवी ने तर्क दिया कि ऐसे हस्तक्षेप मुख्य मुद्दे को भटकाने वाले हो सकते हैं।

सीजेआई ने क्या कहा? 

हालांकि, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने इस पर सख्त रुख नहीं अपनाया। उन्होंने कहा कि हम किसी को अपनी बात कहने से नहीं रोक सकते। सीजेआई ने जोड़ा कि अन्य मामलों में भी इंटरवेनर्स को अनुमति दी जाती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर पक्ष को अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए, भले ही उसकी हैसियत पर सवाल हों।

बता दें कि यह मामला लंबे समय से चर्चा में है। नेताजी के 1945 में ताइहोकू (अब ताइपे) में विमान दुर्घटना में निधन की आधिकारिक मान्यता के बावजूद उनके अवशेषों को लेकर विवाद बना हुआ है। कई मौकों पर परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने अवशेषों को भारत लाने की मांग की है। पहले नेताजी के एक रिश्तेदार की याचिका पर कोर्ट ने यह रुख अपनाया था कि कानूनी उत्तराधिकारी स्वयं आगे आएं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। इंटरवेनर के संदेह और सिंघवी की आपत्ति के बीच सीजेआई के टिप्पणी ने खुलेपन का संकेत दिया। याचिकाकर्ता पक्ष ने जोर दिया कि यह सिर्फ परिवार का नहीं, बल्कि राष्ट्र का मुद्दा है, क्योंकि नेताजी स्वतंत्रता संग्राम के महानायक रहे हैं।

Updated on:
28 Sept 2026 03:41 pm
Published on:
28 Sept 2026 03:13 pm
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