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मेंटेनेंस नहीं देने पर Supreme Court सख्त, पति की सैलरी से कटेगा 25 हजार और जाएगा पत्नी के खाते में

सुप्रीम कोर्ट ने पति-पत्नी विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए पति के नियोक्ता को आदेश दिया है कि उसकी सैलरी से हर महीने 25 हजार रुपये काटकर सीधे पत्नी के खाते में भेजे जाएं। पति चार साल से पत्नी और नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए अदालत के आदेश का पालन नहीं कर रहा था।

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Mar 06, 2026
Supreme Court

Supreme Court ने पति-पत्नी विवाद में अनोखा फैसला सुनाते हुए पति के नियोक्ता को आदेश दिया है कि वह उसकी सैलरी से 25 हजार रुपए काटकर सीधे उसकी पत्नी को दे। पत्नी पिछले चार साल से पति से विवाद के बाद अपनी नाबालिग बेटी के साथ चार साल से अलग रह रही है। इस दौरान पति ने उसको भरण-पोषण के लिए कोई राशि नहीं दी थी। ऐसे में कोर्ट ने सीधे पति के एंप्लॉयर को आदेश दिए हैं।

Supreme Court: क्या है पूरा मामला?


जस्टिस जेबी पारडीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ को बताया गया कि 2022 से पति-पत्नी अलग रह रहे हैं। इस मामले में 2024 में मजिस्ट्रेट ने पति को पत्नी और चार साल की बेटी के भरण-पोषण के लिए 25 हजार रुपए हर माह देने का अंतरिम आदेश दिया था। हालांकि उसने इस आदेश का पालन नहीं किया। पीठ को बताया गया कि अंतरिम आदेश साल 2024 में दिया गया था और पति ने इसका पालन नहीं किया, इसलिए उस पर 1.38 लाख रुपए बकाया हैं। सुनवाई के दौरान पति ने दलील दी कि उसकी सैलरी 50 हजार रुपए महीना है और वह आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इस पर कोर्ट ने पति से पूछा कि क्या वह बकाया के साथ 2.50 लाख रुपए देने को तैयार है, जिससे उसने इनकार कर दिया।

हमारे सामने विकल्प नहीं-Supreme Court


पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा, 'ऐसी स्थिति में हमारे सामने दूसरा विकल्प नहीं है, सिवाय इसके कि हम प्रतिवादी पति के नियोक्ता को यह आदेश दें कि वह उसके वेतन से हर महीना 25 हजार रुपए काटकर आरटीजीएस के जरिए पत्नी के अकाउंट में ट्रांसफर कर दे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह बच्ची के भविष्य और भरण-पोषण का मामला है। कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्ची की मां अपने पिता की मृत्यु के बाद अकेले अंकल के घर पर रहकर उसको पाल रही है। ऐसे में उसे राशि की सख्त जरूरत है। कोर्ट ने अप्रैल में अनुपालना रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।

Published on:
06 Mar 2026 05:58 am
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