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पंजाब में रिश्वतखोरी मामले में CBI की रेड, तीन को दबोचा, एक आरोपी फरार

Punjab Bribery Case: CBI ने पंजाब विजिलेंस से जुड़े रिश्वत मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें 20 लाख की मांग 13 लाख और मोबाइल फोन की डील में बदली गई थी।

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CBI

रिश्वतखोरी के मामले में CBI ने पंजाब में तीन लोगों को किया गिरफ्तार (IANS)

Punjab vigilance: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने पंजाब विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल रिश्वत मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में दो प्राइवेट बिचौलिए शामिल हैं, जबकि मामला 20 लाख रुपये की रिश्वत मांग से जुड़ा बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

CBI के अनुसार यह मामला पंजाब राज्य कर विभाग के एक अधिकारी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी विकास उर्फ विक्की गोयल और उनके पुत्र राघव गोयल ने उनके खिलाफ निदेशक जनरल (विजिलेंस), पंजाब के कार्यालय में लंबित एक शिकायत को निपटाने के बदले 20 लाख रुपये की मांग की थी। जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को वरिष्ठ विजिलेंस अधिकारियों के मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहे थे।

20 लाख की मांग से 13 लाख और मोबाइल पर बनी डील

CBI की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बातचीत के दौरान रिश्वत की राशि घटकर 13 लाख रुपये और एक Samsung Galaxy Z Fold7 स्मार्टफोन पर तय हुई थी। यह फोन पंजाब विजिलेंस के एक अधिकारी को देने की बात सामने आई है।

चंडीगढ़ में गिरफ्तारी

11 मई को CBI ने चंडीगढ़ में ट्रैप ऑपरेशन चलाया, जिसमें बिचौलिए के सहयोगी अंकित वधवा को रंगे हाथों नकद राशि और मोबाइल फोन स्वीकार करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद राघव गोयल, विकास गोयल और अन्य आरोपी मौके से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन एजेंसी ने उन्हें पंजाब-हरियाणा सीमा के पास अंबाला के नजदीक पकड़ लिया।

अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल

CBI ने बताया कि मामले में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के डीजीपी के रीडर ओपी राणा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि उन्होंने रिश्वत मिलने के बाद मामले को “सेट” करने का भरोसा दिया था। फिलहाल राणा फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।

छापेमारी में 9 लाख रुपये बरामद

CBI ने मलोट और चंडीगढ़ स्थित आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें लगभग 9 लाख रुपये नकद और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

जांच में क्या सामने आया?

प्रारंभिक जांच में सामने आया की लंबित विजिलेंस मामलों की गोपनीय जानकारी लीक की जा रही थी। निजी व्यक्तियों और कुछ अधिकारियों के बीच सांठगांठ थी और सरकारी सुरक्षा में तैनात गनमैनों की भूमिका भी संदिग्ध है।

आगे की कार्रवाई

गिरफ्तार सभी आरोपियों को चंडीगढ़ की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। CBI ने कहा है कि यह केवल शुरुआती कार्रवाई है और पूरे रैकेट व साजिश की गहन जांच जारी है।