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वैवाहिक केस में महिला ने मांगे 30 करोड़ तो सुप्रीम कोर्ट में जज ने दिया मजेदार जवाब, कहा- हमें तो सैलरी ही लाखों में मिलती है

matrimonial case in supreme court: वैवाहिक केस में पत्नी ने मांगे 30 करोड़ रुपये। इस पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एससी शर्मा ने मजेदार जवाब दिया। उन्होंने कहा- हमारी सैलरी तो लाखों में ही मिलती है, इसलिए पांच अंक से आगे दिमाग काम नहीं करता।
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Oct 01, 2026
court news
कोर्ट के संबंध में प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फाइल फोटो- पत्रिका ग्राफिक्स)

सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में गुरुवार को एक मजेदार वाकया हुआ। दरअसल, जस्टिस एससी शर्मा ने करोड़ों रुपये की बात सुनकर अपना दिमाग घूमने की बात कह दी।

सुप्रीम कोर्ट में एक वैवाहिक विवाद की सुनवाई चल रही थी। पत्नी की तरफ से वकील ने भारी भरकम रकम की मांग रखी। जस्टिस एससी शर्मा ने वकील से पूछा कि क्या आप 45 लाख और बच्चे के लिए ट्रस्ट में 30 लाख चाहते हैं? इस पर वकील ने तुरंत जवाब दिया।

वकील ने क्या कहा?

वकील ने जज साहब की बात को तुरंत सुधारते हुए कहा कि नहीं सर, 30 लाख नहीं बल्कि हम 30 करोड़ की मांग कर रहे हैं। यह सुनते ही जस्टिस शर्मा मुस्कुराते हुए बोले- हमारी सैलरी तो लाखों में ही आती है। इसलिए पांच अंक से आगे दिमाग काम करना बंद कर देता है।

जस्टिस एससी शर्मा ने आगे कहा- कभी-कभी मिलियन और बिलियन में भी कन्फ्यूजन हो जाता है। इतना सुनने के बाद कोर्ट रूम में मौजूद लोग हल्के से हंस पड़े। इतनी बड़ी रकम सुनकर जज साहब का यह साफगोई भरा जवाब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

क्या था मामला?

यह एक सामान्य वैवाहिक मामला था जिसमें पत्नी पक्ष आर्थिक सुरक्षा और बच्चे के भविष्य के लिए बड़ी रकम मांग रहा था। जज ने दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुनी। बहस खत्म होने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया गया। यानी फैसला बाद में आएगा।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में उसी वक्त एक और मजेदार वाकया हुआ। जस्टिस शर्मा अपनी कुर्सी से उठने ही वाले थे कि कोर्ट मास्टर ने याद दिलाया कि अभी और मामले बाकी हैं।

क्यों जज साहब को बोलना पड़ा सॉरी?

कोर्ट मास्टर की बात सुनने के बाद जज साहब तुरंत रुक गए और बोले- अच्छा अभी और मामले बाकी हैं। सॉरी। यह छोटा सा वाकया कोर्ट रूम के गंभीर माहौल में हल्की राहत लेकर आया। जज साहब ने गलती मानते हुए माफी मांग ली और सुनवाई जारी रखी।

क्यों चर्चा में आया यह पल

सुप्रीम कोर्ट जैसी जगह पर आम भाषा में बात करना और अपनी सीमाएं स्वीकार करना कम ही देखने को मिलता है। जस्टिस शर्मा का यह अंदाज लोगों को पसंद आया।

वहीं, करोड़ों की रकम सुनकर लाखों वाली सैलरी का जिक्र करना और मिलियन-बिलियन का कन्फ्यूजन बताना, यह सब इतना आसान अंदाज में कहा गया कि सुनने वाले मुस्कुरा दिए।

Updated on:
01 Oct 2026 02:54 pm
Published on:
01 Oct 2026 02:53 pm