SC on Stray Dogs: आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को 7 अगस्त 2026 तक हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि समय रहते कुत्तों की आबादी नियंत्रित की जाती तो हालात इतने भयावह नहीं होते।
Supreme Court on Stray Dogs: देशभर में बढ़ती डॉग बाइट और आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि वे 7 अगस्त 2026 तक संबंधित हाईकोर्टों में विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि यदि समय रहते पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया होता, तो हालात इतने गंभीर नहीं बनते।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और लगातार हो रहे हमले संबंधित एजेंसियों की विफलता को दर्शाते हैं।
अदालत ने कहा कि देश के कई हिस्सों में स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों पर लगातार हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है।
कोर्ट ने कहा कि यदि शुरुआत से ही नसबंदी, टीकाकरण और पर्याप्त संस्थागत ढांचे को विकसित करने पर गंभीरता दिखाई गई होती, तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कई राज्यों की स्थिति पर चिंता जताई।
कोर्ट के अनुसार, राजस्थान के श्रीगंगानगर में तीन महीनों के भीतर 1840 डॉग बाइट मामले सामने आए। सीकर में बच्चों पर हमलों की घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि उदयपुर में 2026 के दौरान 1750 मामले रिपोर्ट किए गए। भीलवाड़ा में एक ही दिन में 42 लोगों को आवारा कुत्तों ने काट लिया।
तमिलनाडु में 2026 के शुरुआती चार महीनों में करीब 2.63 लाख डॉग बाइट मामले सामने आए और 17 लोगों की मौत हुई।
कर्नाटक में इसी अवधि के दौरान 2 लाख से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा, जबकि रेबीज से 25 मौतें दर्ज की गईं।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी चार महीनों में कुत्तों के काटने की 31 घटनाएं सामने आईं। वहीं गुजरात के सूरत में एक विदेशी नागरिक को आवारा कुत्ते ने काट लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने-अपने हाईकोर्ट में यह बताएं कि अदालत के निर्देशों के पालन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
अदालत ने हाईकोर्टों से भी कहा कि वे हर चार महीने में सुप्रीम कोर्ट को समेकित रिपोर्ट सौंपें, ताकि मामले की लगातार निगरानी की जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी अब केवल पशु प्रबंधन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह सार्वजनिक सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट बन चुका है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों का सुरक्षित और भयमुक्त जीवन जीना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को तय की है। तब तक राज्यों और हाईकोर्टों से प्राप्त रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब राज्यों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने का दबाव बढ़ेगा।