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UGC के नए नियमों के खिलाफ फिर याचिका: CJI ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा- अब ये ज्यादा हो रहा

UGC Equity Regulations 2026 के खिलाफ नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। CJI सूर्यकांत ने इसे 'मीडिया में सुर्खियां बटोरने का प्रयास' बताते हुए पूछा कि यह याचिका पिछली याचिकाओं से अलग कैसे है। जानें कोर्ट की तीखी टिप्पणी और यूजीसी के इन विवादित नियमों का पूरा मामला।
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Updated: 25 Feb 2026, 6:29 PM IST
Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर याचिका दाखिल की गई है, जिस पर बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई। सुनवाई के दौरान उन्होंने याचिकाकर्ता से तीखा सवाल किया कि इस नई याचिका में पिछली याचिकाओं की तुलना में नया क्या है। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने दलील पेश करते हुए कहा कि उनका मुख्य आधार यह है कि यूजीसी ने इन नियमों को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बनाया है।

वकील की दलीलों पर असंतोष व्यक्त करते हुए CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि यह केवल मीडिया में चर्चा बटोरने का एक प्रयास मात्र है। उन्होंने पूछा कि आखिर इस विषय पर बार-बार जनहित याचिका क्यों दाखिल की जा रही है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि अब ये ज्यादा हो रहा है और ऐसा प्रतीत होता है कि यह सब मीडिया में चर्चा में आने के लालच में किया जा रहा है, ताकि यूट्यूब जैसे मंचों पर उपस्थिति दर्ज कराई जा सके। पीठ ने दोहराया कि याचिका में ऐसी कोई नवीनता नहीं है जो इसे अन्य लंबित याचिकाओं से अलग करती हो।

यूजीसी के नए नियमों पर लगी है रोक

'UGC Equity Regulations 2026' को लेकर पहले ही कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट दाखिल की गई हैं। शीर्ष अदालत ने इन नियमों पर जनवरी माह में ही रोक लगा दी थी। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि ये नियम प्रथम दृष्टया अस्पष्ट प्रतीत होते हैं, जिनके व्यापक और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। अदालत ने यह आशंका भी जताई थी कि इन नियमों के दुरुपयोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता और इनसे समाज में विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।

पिछली याचिका में क्या दी गई थी दलील

पिछली याचिका में इन नियमों के खिलाफ दी गई दलीलों में मुख्य रूप से यह कहा गया है कि यूजीसी ने जाति-आधारित भेदभाव की एक 'गैर-समावेशी' परिभाषा अपनाई है, जिससे कुछ विशेष वर्ग को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है। याचिकाओं में इस विनियम को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि जाति-आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों के विरुद्ध होने वाले भेदभाव तक ही सीमित कर दिया गया है। इसी कारण देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र समूहों और संगठनों द्वारा इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा।

Updated on:
25 Feb 2026, 6:29 PM IST
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