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नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला, सभी याचिकाओं का होगा निपटारा

Demonetisation Supreme Court Verdict नए साल 2023 के दूसरे दिन आज सुप्रीम कोर्ट एक बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है। बस थोड़ा इंतजार करना है। मोदी सरकार ने वर्ष 2016 में नोट बंदी की थी। जिसके तहत 1,000 रुपए और 500 रुपए के नोटों को बंद कर दिया था। आज 2 जनवरी 2023 को नोटबंदी खिलाफ दायर याचिकाओं का सुप्रीम कोर्ट करेगी निस्तारण।  

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Jan 02, 2023
नोटबंदी पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगा फैसला, सभी याचिकाओं का होगा निपटारा

नए साल 2023 के दूसरे दिन आज सुप्रीम कोर्ट एक बड़ा फैसला सुनाने जा रहा है। बस थोड़ा इंतजार करना है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 नोटबंदी की थी। जिसके तहत केंद्र सरकार ने नवंबर 2016 में 500 रुपए और 1,000 रुपए के नोटों को बंद कर दिया था। केंद्र सरकार के नोटबंदी के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं, केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद 7 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। बेंच में जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम भी शामिल हैं, जिन्होंने सरकार और RBI को 8 नवंबर 2016 की अधिसूचना के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा था। नोटबंदी के खिलाफ करीब 58 याचिका दाखिल की गई है।

दो अलग-अलग फैसले होंगे

सुप्रीम कोर्ट की लिस्ट के अनुसार, इस मामले में दो अलग-अलग फैसले होंगे, जो जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस बी. वी. नागरत्ना सुनाएंगे। जस्टिस नजीर, जस्टिस गवई और जस्टिस नागरत्ना के अलावा, पांच जजों की बेंच के अन्य सदस्य जस्टिस ए. एस. बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन हैं।

सात दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और RBI को सात दिसंबर को निर्देश दिया था कि वे सरकार के 2016 में 1000 रुपए और 500 रुपए के नोट को बंद करने के फैसले से संबंधित रेकॉर्ड पेश करें। बेंच ने केंद्र के 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, RBI के वकील और सीनियर वकील पी. चिदंबरम और श्याम दीवान समेत याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनी थीं और अपना फैसला सुरक्षित रखा था।

सरकार ने दी थी ये दलील

1000 और 500 रुपए के नोटों को बंद करने के फैसले को गंभीर रूप से दोषपूर्ण बताते हुए चिदंबरम ने दलील दी थी कि, केंद्र सरकार कानूनी निविदा से संबंधित किसी भी प्रस्ताव को अपने दम पर शुरू नहीं कर सकती है और यह केवल आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर किया जा सकता है। वर्ष 2016 की नोटबंदी की कवायद पर फिर से विचार करने के सुप्रीम कोर्ट की कोशिश का विरोध करते हुए सरकार ने कहा था कि, अदालत ऐसे मामले पर फैसला नहीं कर सकती है, जब बीते वक्त में लौट कर कोई ठोस राहत नहीं दी जा सकती है।

Updated on:
02 Jan 2023 09:46 am
Published on:
02 Jan 2023 09:44 am
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