
Supreme Court Verdict on Stray Dogs: देशभर में बढ़ती डॉग बाइट और आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाओं पर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि नागरिकों का भयमुक्त और सुरक्षित जीवन जीना भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने साफ किया कि जहां आवारा कुत्तों की संख्या खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है और लगातार हमले हो रहे हैं, वहां नियमों के तहत रेबीजग्रस्त, हिंसक और खतरनाक कुत्तों को इच्छामृत्यु दी जा सकती है।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने आवारा कुत्तों की समस्या और पशु जन्म नियंत्रण (ABC) नियमों से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने 7 नवंबर 2025 को दिए गए अपने पुराने निर्देशों को भी बरकरार रखा और उनके खिलाफ दाखिल सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि देश के कई हिस्सों में छोटे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों पर आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। अदालत ने इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि संविधान ऐसे समाज की कल्पना नहीं करता जहां लोग सार्वजनिक स्थानों पर डर के साए में जीने को मजबूर हों।
फैसले में जस्टिस संदीप मेहता ने लिखा, “न्यायालय जमीनी हकीकत से अनभिज्ञ नहीं रह सकता। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर हमले हुए हैं। आम नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित हो गए हैं।”
अदालत ने राज्यों और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सरकारी अधिकारी लोगों को कुत्तों के हमलों से बचाने में अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं कर पाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हैं तो उनके खिलाफ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए कई सख्त और विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि रेबीज से संक्रमित, हिंसक और खतरनाक आवारा कुत्तों को नियमों के तहत इच्छामृत्यु दी जा सकती है।
कोर्ट ने हर जिले में कम से कम एक Animal Birth Control (ABC) सेंटर स्थापित करने का निर्देश दिया है ताकि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित की जा सके।
राज्य सरकारों को रेबीज रोधी वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि डॉग बाइट पीड़ितों को समय पर इलाज मिल सके।
अदालत ने यह भी कहा कि स्थानीय निकायों और संबंधित विभागों के अधिकारी जब अपने कर्तव्यों का पालन करें तो उन्हें पर्याप्त सुरक्षा दी जाए और उनके खिलाफ अनावश्यक एफआईआर या शिकायत दर्ज न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को भारतीय पशु कल्याण बोर्ड के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को हाइवे और एक्सप्रेसवे को आवारा पशुओं और कुत्तों के खतरे से सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा अदालत ने सभी हाईकोर्ट्स से कहा है कि वे इस फैसले के अनुपालन की निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर स्वतः संज्ञान लेकर मामले दर्ज करें।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को भी बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और खेल परिसरों जैसी सार्वजनिक जगहों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा था कि खतरनाक और हिंसक कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखा जाए और डॉग फीडिंग के लिए निर्धारित स्थान तय किए जाएं।
देश के कई राज्यों में हाल के महीनों में आवारा कुत्तों के हमलों के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई घटनाओं में छोटे बच्चों और बुजुर्गों की मौत तक हो चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुत्तों की बढ़ती आबादी, टीकाकरण की कमी और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर प्रशासनिक नीतियों और कानूनी जिम्मेदारियों पर बड़ा असर डाल सकता है।